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एकता का पाठ पढ़ाती कविता: आओ दीप जलाकर खुशियां मना लें...

Updated: शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017 (17:26 IST)
- यासमीन हुसैन 'कवंल'
आओ दीप जलाकर खुशियां मना लें। 
घर-आंगन को खुशनुमा बना लें॥
अपना घर ही दोस्तों क्यों जगमगाएं। 
आओ उस निर्धन का भी घर सजा दें॥
 
देश को एकता का पाठ पढ़ा दें। 
पुराने दौर सा साहस दिखा दें॥
जैसे एक होकर अंगरेजों को भगाया। 
आओ मिलकर देश-द्रोही मिटा दें॥
 
पलट कर रख दें वो सत्ता जो लड़ाएं। 
दीपावली में ऐसे हर रावण को मिटा दें॥
जगमग-जगमग है शाम बहुत गजब है।
आओ मीठी आवाज में प्यारा गीत सुना दें॥
 
ये हरियाली सब के लिए है! 
ये दीपावली सब के लिए है। 
ये संदेश जन-जन तक पहुंचा दें॥
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई आपस में भाई-भाई। 
आओ मिल कर भ्रष्टाचार मिटा दें॥
 
दीप से दीप जला कर राम कसम कहते हैं।
प्रेम और शांति का पैगाम देंगे।
खुशियों के हर घर दीप जला देंगे। 
चारों ओर का अंधेरा मिटा देंगे॥
मिटा देंगे हम भ्रष्ट नेतागिरी।
महात्मा गांधी की सीख सिखा देंगे॥
 
कोई बाग-बगीचा हमको न मिले न सही।
ईश्वर-अल्लाह कीचड़ में भी 'कवंल' खिला देंगे॥

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