मंगलदीप जलाओ अंतस में जो फैले अंधियारे उसको दूर हटाओ मंगलदीप जलाओ। हर साल है मरता रावण फिर भी सीता है बिलखती लूट, अत्याचार में डूबा शासक है जनता सोती रहती मंगलदीप जलाओ। जनता-जनार्दन को उसकी कुंभकर्णी नींद से जगाओ हे शासक तुम प्रजा के बन...