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जाने-माने शायर अजमल सुलतानपुरी का निधन

Updated: गुरुवार, 30 जनवरी 2020 (16:34 IST)
जाने-माने शायर अजमल सुलतानपुरी का बुधवार की शाम को लम्बी बीमारी के बाद सुलतानपुर के खैराबाद मोहल्ले में स्थित आवास पर निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे।

अजमल सुलतानपुरी की रचना ‘कहां है मेरा प्यारा हिंदुस्तान, उसे मैं ढूंढ रहा हूं’ काफी चर्चित रही और उनकी गजलों ने जिले को एक अलग पहचान दिलाई है।

बीती 6 जनवरी को वयोवृद्ध शायर अजमल सुलतानपुरी को शहर में स्थित करुणाश्रय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोमा में चले जाने के बाद डॉक्टरों की सलाह पर उनके परिवार वाले उन्हें घर पर ले आए थे। बुधवार की शाम लगभग साढ़े 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की तरफ से उन्हें 'लाइफ टाइम एचीवमेंट एवार्ड' से नवाजा गया था। अजमल सुलतानपुरी होश संभालने के बाद से ही अपनी आर्थिक जीवन स्थितियों, समय और समाज की विसंगतियों से संघर्ष करते रहे। उनके गीतों में भारत की साझा संस्कृति और अवधी बोली बानी का स्वर सुनाई पड़ता है।

देश के कई बड़े शहरों के अलावा दुबई, कुवैत और सऊदिया में भी अपने गीतों तथा ग़ज़लों का परचम लहरा चुके अजमल का जन्म सुलतानपुर जिले के कुड़वार बाजार के निकट हरखपुर गांव में 1923 में हुआ था। 1967 में गांव की कुछ सामाजिक बुराइयों का विरोध करने पर लोगों ने उनकी बुरी तरह पिटाई की थी।

ठुकरा दिए अच्‍छे ऑफर
शायर अजमल सुलतानपुरी की शायरी में कोई बनावटी पन नहीं था। उनकी शायरी में आत्म पीड़ा की ही नहीं पूरी दुनिया की पीड़ा झलकती है। उन्हें मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री से कई आफर आए थे। एक बार कुछ लोग घर पर भी आए। उन्होंने यह कहकर आफर ठुकरा दिया था कि हमारी ही बहू बेटियां फिल्मों में मेरे ही गीत पर नाचेंगी गाएंगी यह मुझे मंजूर नहीं है। वैसे तो मुशायरों व अन्य मंचों पर अजमल साहब को कई पुरस्कार मिल चुका है पर सरकार को उनकी रचनाधर्मिता को परखने में लंबा समय लग गया। हालांकि, इसका उन्हें कोई मलाल नहीं था। करीब छह साल पहले उन्हें उप्र उर्दू अकादमी की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।

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