Parents इन बातों का जरूर रखें ख्याल, बढ़ता है बच्चों का आत्मविश्वास

poem on star
नेहा रेड्डी|
इस चुनौतीपूर्ण जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। हर तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कई प्रकार के लोग मिलते हैं, जो आपको नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। इन सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए आपके अंदर का होना बहुत जरूरी है। आप खुद को दूसरों की नजरों से न आंकें, बल्कि खुद पर विश्वास और नियंत्रण ही आत्मविश्वास है। इसे सफलता की चाबी कहना गलत नहीं होगा।
यह नींव बचपन में ही तैयार हो जाती है। आपने जरूर सुना होगा कि बच्चे कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें जो आकार दिया जाए, वे उसी आकार में ढलते जाते हैं। इसलिए यह जिम्मेदारी माता-पिता की होती है कि वे अपने बच्चों में अच्छे संस्कार के साथ उन्हें हर परिस्थितियों का सामना करना सिखाएं ताकि वे हर मुश्किल का सामना डटकर कर सकें, डरकर सहमकर न बैठें।

आत्मविश्वास जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत आवश्यक है जिसको बच्चों में सींचने के लिए उन्हें समझना जरूरी है। उनके मन की बातों को जानना जरूरी है और इस महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी होती है माता-पिता की। आइए जानते हैं कुछ खास बातें, जो आपके बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करती हैं।
रुचि का रखें ख्याल

बच्चों की रुचि पर ध्यान दें। उनकी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों पर भी आपका ध्यान होना चाहिए। यदि आपका बच्चा खेलकूद में रुचि रखता है तो उसे उसकी पसंद के हिसाब से आगे बढ़ने दें, उनका साथ दें।

अपनी बातें उन पर न थोपें

किसी भी चीज को बच्चों के ऊपर न थोपें। वे क्या चाहते हैं, इस बात को भी प्राथमिकता दें। अगर आपको लगता है कि इससे उनको नुकसान पहुंच सकता है या उनके लिए वो चीज ठीक नहीं है, तो बैठकर खुलकर उनसे बात करें।
बच्चों को समय दें

बच्चों को समय दें, उनसे बात करें। अगर आपको लग रहा है कि आपका बच्चा कुछ समय से परेशान है या कुछ बातें छुपा रहा है, तो उनसे बैठकर आराम से बात करें। उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि आप हर परिस्थिति में उनके साथ हैं, चाहे कुछ भी हो जाए।

दबाव न बनाएं

अगर बच्चा पढ़ाई में पीछे है तो उन पर दबाव न बनाएं। चिल्लाना या उन पर गुस्सा होना, यह न करें। माना कि गुस्सा भी जरूरी है लेकिन आप अपनी बातों को इस तरह से सामने पेश न करें कि आप उन पर दबाव डाल रहे हैं।
बच्चों को प्रोत्साहित करें

आप अपने बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें प्रोत्साहित करें, उनके कामों की सराहना करें। उनके छोटे-छोटे कामों की सराहना करें, जैसे अच्छी पेंटिंग या किसी सवाल को हल करने पर। ऐसा करने से बच्चे खुश होते हैं और लगन के साथ अपने काम को करते हैं और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

बच्चों की पहली पाठशाला उसका अपना खुद का घर
कहते हैं कि बच्चों की पहली पाठशाला उसका अपना खुद का घर होता है। अगर आपका बच्चा अपनी बात कहने से घर में ही डरता है तो वह बाहर भी इसी नेचरल के साथ रहेगा इसलिए उन्हें अपनी बात रखना सिखाएं।

हार से न डरें

बच्चों को यह बात जरूर बताएं कि जिंदगी में अगर हार का सामना करना पड़े तो इससे घबराने या उदास होने की जरूरत नहीं है। जिंदगी हर तरह के अनुभवों से भरी पड़ी है। आप हारकर भी कुछ सीखते हैं। हर व्यक्ति के जीवन में हार-जीत चलती रहती है। नजरिया ही जीवन की हर परिस्थिति से निपटने के लिए जरूरी है।




और भी पढ़ें :