गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, जमीन मापने के लिए बनी नई कार्यप्रणाली, गलतियों का होगा सुधार
Big decision of Gujarat government : गुजरात में खेती की जमीन की माप (प्रोमोलगेशन) प्रक्रिया के बाद किसानों को होने वाली समस्याओं और मापनी में रह गई त्रुटियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जमीन मापनी की गलतियों को सुधारने के लिए अब पूरे राज्य में 'भूमि सीमांकन पद्धति' के तहत एक समान और नियोजित कार्यप्रणाली लागू की जाएगी, जिससे किसानों की शिकायतों का सटीक और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
राजस्व विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी
इस नई पद्धति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राजस्व विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष 'भूमि सीमांकन समिति' कार्यरत की जाएगी। ये समितियां उन गांवों में मापनी से संबंधित सभी शेष त्रुटियों को सुधारने के लिए जिम्मेदारी से काम करेंगी जहां प्रोमोलगेशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
'मोबाइल मजिस्ट्रेट कोर्ट' समिति का गठन
जमीन मापनी की गलतियों से संबंधित आवेदनों के त्वरित और व्यवस्थित निपटान के लिए उन्हें सात अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इसके अलावा, जटिल समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए विशेष 'मोबाइल मजिस्ट्रेट कोर्ट' समिति का भी गठन किया जाएगा। यह समिति नियमानुसार कार्यवाही कर मौके पर ही समाधान लाएगी, ताकि किसानों को अपने काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
किसानों के हितों की रक्षा होगी
राज्य सरकार के इस किसान-हितैषी निर्णय से ग्रामीण किसानों के हितों की रक्षा होगी और उनके लंबित मुद्दों का स्थाई समाधान आएगा। यह कदम कृषि क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देगा और राज्य के नागरिकों को पारदर्शी सुशासन (गुड गवर्नेंस) का सटीक और प्रभावी अनुभव कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Edited By : Chetan Gour
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