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Last Modified: गांधीनगर , शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026 (18:25 IST)

गुजरात में 25 महीने और 314 शेरों की मौत, राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया

How many lions died in Gujarat in 2025-26
How many lions died in Gujarat: गुजरात विधानसभा से चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। पिछले 25 महीनों में राज्य ने अपने 314 बब्बर शेरों को खो दिया है, जिनमें सबसे बड़ी संख्या नन्हे शावकों की है। गांधीनगर में जारी विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने स्वीकार किया कि हर महीने औसतन 12 से अधिक शेरों की मौत हो रही है। हालांकि अधिकांश मौतें प्राकृतिक बताई जा रही हैं।
 
गुजरात विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्नकाल में राज्य सरकार ने शेरों की मृत्यु को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। कांग्रेस विधायक शैलेष परमार द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि राज्य में पिछले 25 महीनों में कुल 314 शेरों की मृत्यु हुई है। इस जानकारी के सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने इसको लेकर चिंता जाहिर की है। 

राज्य में शेरों की कुल संख्या 911 

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी 2026 की स्थिति तक राज्य में शेरों की कुल संख्या 911 दर्ज की गई है। इस कुल आबादी में 255 नर शेर, 405 शेरनियां और 231 शावक (बच्चे) शामिल हैं। पिछले दो साल और एक महीने की अवधि में हुई 314 मौतों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इनमें 75 शेर, 91 शेरनियां और सबसे अधिक 148 शावकों ने अपनी जान गंवाई है।

251 शेरों की मौत नेचुरल

मृत्यु के कारणों पर स्पष्टीकरण देते हुए वन विभाग ने बताया कि कुल 314 मौतों में से 251 शेर प्राकृतिक कारणों से मरे हैं। प्राकृतिक रूप से मरने वालों में 58 शेर, 67 शेरनियां और 126 शावक शामिल हैं। हालांकि, 63 शेरों की मृत्यु अप्राकृतिक (Unnatural) कारणों से हुई है, जो चिंता का विषय है। इन अप्राकृतिक मौतों में 17 शेर, 24 शेरनियां और 22 शावक शामिल हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

शेरों के स्वास्थ्य पर सतत निगरानी

सदन को आश्वस्त किया गया है कि शेरों के संरक्षण और उनके स्वास्थ्य पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। शेरों के आवास क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रत्येक मृत्यु के कारणों की विस्तृत जांच की जाती है ताकि अप्राकृतिक मौतों को कम किया जा सके। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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