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Written By WD

हाथों-हाथों में

हाथ भूपेन्द्र राठौर ठेला केले
WDWD
एक आम आदमी जब झंडाचौक में ठेले से केले चुराते रंगे हाथों पकड़ा गया तो सिपाही और उसके बीच बातचीत कुछ यूँ चली -

सिपाही - क्यों रे! कानून हाथ में ले रहा था?

आदमी - कहाँ सर, मेरे हाथ में तो केला है।

सिपाही - अबे! यह नहीं जानता, केले के ठेले पे हाथ साफ करना यानी कानून हाथ में लेना है।

आदमी - सॉरी सर! हाथ जोड़ता हूँ।

सिपाही - दूँगा दो हाथ! चल जल्दी से मेरे हाथ पर कुछ रख दे।

आदमी - हाथ तंग है सरकार। बेटी के हाथ पीले करने के बाद कर्जों में फँस गया हूँ।

सिपाही - समझ जा! वर्ना स्थिति हाथ से निकल जाएगी।

आदमी - किस्मत में इतना अंधकार है सरकार कि हाथ को हाथ नहीं सूझता। कोई गॉडफादर भी नहीं, जो सिर पे हाथ रख दे।

सिपाही - अबे! इसका मतलब रास्ते चलते हाथ की कारीगरी दिखाओगे?

आदमी - वक्त पलटना कोई अपने हाथ की बात नहीं, सरकार!

सिपाही - बातें मत बना! कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। बचेगा नहीं।

आदमी - तो ऐसा करें, ये हाथघड़ी ले लें, सरकार। बंद पड़ी है पर काँटे घूमते रहते हैं।

सिपाही - अरे वाह मेरे फटाका हाथरसी ये हुई ना बात? मिला हाथ।