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हाथों-हाथों में
एक आम आदमी जब झंडाचौक में ठेले से केले चुराते रंगे हाथों पकड़ा गया तो सिपाही और उसके बीच बातचीत कुछ यूँ चली - सिपाही - क्यों रे! कानून हाथ में ले रहा था? आदमी - कहाँ सर, मेरे हाथ में तो केला है। सिपाही - अबे! यह नहीं जानता, केले के ठेले पे हाथ साफ करना यानी कानून हाथ में लेना है। आदमी - सॉरी सर! हाथ जोड़ता हूँ। सिपाही - दूँगा दो हाथ! चल जल्दी से मेरे हाथ पर कुछ रख दे। आदमी - हाथ तंग है सरकार। बेटी के हाथ पीले करने के बाद कर्जों में फँस गया हूँ। सिपाही - समझ जा! वर्ना स्थिति हाथ से निकल जाएगी। आदमी - किस्मत में इतना अंधकार है सरकार कि हाथ को हाथ नहीं सूझता। कोई गॉडफादर भी नहीं, जो सिर पे हाथ रख दे। सिपाही - अबे! इसका मतलब रास्ते चलते हाथ की कारीगरी दिखाओगे? आदमी - वक्त पलटना कोई अपने हाथ की बात नहीं, सरकार! सिपाही - बातें मत बना! कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। बचेगा नहीं। आदमी - तो ऐसा करें, ये हाथघड़ी ले लें, सरकार। बंद पड़ी है पर काँटे घूमते रहते हैं। सिपाही - अरे वाह मेरे फटाका हाथरसी ये हुई ना बात? मिला हाथ।