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Written By WD

अब तक साठ...

अब तक साठ... जितेंद्र वेद
- जितेंद्र वेद
Devendra SharmaND

जातिवाद के दलदल में फँस गई सियास‍त,
पटेल ने जोड़ी, पर अब बँट रही रियासत।

कानून का खून करते हैं हम हर रोज,
अवाम में फैला भरा, गायब हुआ अब ओज

'डेमो' तो 'डेमो' की हो गई चीज
राजनीति के जंगल में खो गए नाचीज।

वृक्षों को काटकर लगा रहे हैं पौधे,
'सेज' के नाम पर, जीवन के होते सौदे

अपराध का सबक सीख रहे हैं नेता,
फिर भी कहते हैं हमारा युग है त्रेता।

'सेज' बन गया अब भ्रष्‍टाचार का मंत्र,
घपलों से खुश हुआ नौकरशाह का तंत्र।

'पेज 3' 'अब तक 56' बने नए पंचतंत्र
अपराध जगत से ग्रीजिंग करता राजनीति का यंत्र

अब तक साठ, हुए नेताओं के ठाठ
पहले थे कुछ लाट, अब हजारों का ठाठम् ठाठ।