मेरी दोस्ती, मेरा प्यार

विशाल मिश्रा
आज भी जब दोस्ती के किस्से कहीं पढ़ता या सुनता हूँ तो ईश्वर की कृपा मानता हूँ कि इस दोस्ती को मैं आज जी भी रहा हूँ। कुछ भी नहीं रहता दुनिया में लोगों रह जाती है दोस्ती। ज़िंदगी का नाम दोस्ती, दोस्ती का नाम ज़िंदगी।



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