वर्ष 2020 सिखा गया हमें ये 10 सबक, जो जिंदगीभर याद रहेंगे

वर्ष 2020 बहुत ही उथल-पुथल वाला वर्ष रहा। यह वर्ष दुनियाभर के लोगों को दु:ख देने वाला सिद्ध हुआ। आओ जानते हैं कि इस वर्ष से हमें कौनसे वो 10 सबक मिले जिसे हमें जिंदगीभर याद रखना चाहिए। जो लोग यह सबक याद नहीं रखेंगे वे वही लोग हो सकते हैं जिन्हें अपने और अपने परिवार की कोई चिंता नहीं है और जो खुद को बादशाह समझते हैं।

1. पारिवारिक सोच जरूरी : वर्ष 2020 की शुरुआत ही जेएनयू हिंसा और शाहीन बाग आंदोलन के दौरान दिल्ली दंगे से हुई और इस वर्ष के अंत में किसान आंदोलन के भीतर से निकलते सच से हमने यह जाना की ये आंदोलन और हिंसा क्यों और किसलिए होते हैं। क्या हमें आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए बगैर यह सोचे समझे कि आंदोलन कर रहे नेताओं का क्या हित है और वे किस पार्टी से संबंध रखते हैं? आने वाले समय में अब धरना और प्रदर्शन का स्वरूप भी बदलेगा। समझदार लोग प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। सरकारें भी इन पर रोक लगाने के लिए ‍कुछ न कुछ कानूनी उपाय खोजने लगेगी।
2. राशन का स्टाक जरूरी : शाहीनबाग आंदोलन के दौरान ही कोरोना वायरस के कारण 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद 23 मार्च को लॉकडाउन लगा दिया। अचानक से लगे लॉकडाउन ने लोगों को संभलने का मौका ही नहीं दिया। घर में ना किराना था ना सब्जी का स्टाक। ऐसे में यह सबक मिला की घर में कम से कम इतना राशन पानी तो होना ही चाहिए कि 3 माह आराम से निकाले जा सके।

3. घर है तो संसार है : लॉकडाउनक के दौरान वे लोग ज्यादा परेशान हुए जिनके किराए के घर थे और इसी दौरान उनकी नौकरी भी छूट गई थी। ऐसे में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। यदि खुद का घर होता तो कम से कम मकान मालिक के तगादे से बच जाते और यदि घर लोग पर किस्तों में भी होता तो बैंक तीन माह का मोनोटोरियम प्लान भी तो दे रही थी। अब आने वाले समय में जो लोग यह मानते थे कि खुद का घर लेने की क्या जरूरत है किराए के घर में रहकर ही जिंदगी गुजारी जा सकती है। ऐसे लोगों की अब सोच बदलेगी। लोग अब अपनी प्राथमिकताओं में घर को सबसे ऊपर रखेंगे। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने घर के बजाय दुकान खरीदने को ज्यादा महत्व दिया है अब वे भी घर खरीदने पर विचार करेंगे। घर है तो संसार है।
4. मांसाहार से दूरी : इस वर्ष लोगों ने जाना की बैक्टीरिया और वायरस अलग-अलग होते हैं। बैक्टीरिया से तो बचा जा सकता है परंतु वायरस से बचना मुश्‍किल है। वैज्ञानिक कहते हैं कि लगभग 17 लाख से ज्यादा वायरस अस्तित्व में हैं और उनमें से भी 3.20 वायरस घातक है। इसमें भी 219 वायरस ऐसे हैं जो मनुष्य की जान ले सकते है। वायरस को जिंदा रहने के लिए किसी ना किसी शरीर की जरूरत होती है परंतु बैक्टीरिया शरीर के बाहर की परत पर ही जिंदा रह सकता है। लोगों ने यह जाना की यह वायरस मांसाहार से फैलता है और इसके होने के सबसे ज्यादा चांस वहां रहते हैं जहां मांस बिक रहा है। ऐसे में लोग अब मांसाहर से दूर रहेंगे। कोविड 19 वायरस प्रोटिन की खोल के भीतर सुरक्षित रहता है। जो लोग मांस खाने के शौकिन हैं वे अब मांस को लाने और उसे पकाकर खाने में बहुत ही सावधानी रखेंगे।
5. हाइजेनिक होना जरूरी : अब लोग पहले की अपेक्षा अधिक हाइजेनिक होंगे। जो नहीं होंगे उनसे लोग दूरी बनाकर रखेंगे। जो इस आदत को अपनाए रखेगा वह खुद को और अपने परिवार सहित समाज को भी बचा कर रखेगा। जब लोगों को यह पता चल गया है कि यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को फैलता है तो सोशल डिस्टेंस रखना रखान बहुत ही जरूरी होगा। इसके लिए बस, ट्रेन, ऑफिस, स्कूल, ऑडिटोरियम, सिनेमाहाल, छोटे-बड़े सभी शॉपिंग मॉल और दुकानों आदि सभी सार्वजनिक जगहों पर जो लोग दूरी बनाकर रखेंगे वही खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख पाएंगे।
6. डिजिटल पेमेंट : अब रुपयों के लेन-देने से भी बचना जरूरी होगा। इसके लिए मोबाइल से पेंमेंट करने की आदत डालना होगी। लॉकडाउन में बिजली, पानी, क्रेडिट कार्ड व फोन जैसी सुविधाओं के बिलों का ऑनलाइन भुगतान 73 फीसदी तक बढ़ा है। फाइनेंशियल कंपनी, रेजर पे की रिपोर्ट में लॉकडाउन से पहले और बाद के नतीजों का विश्लेषण किया गया है। डिजिटल पेमेंट में 43 फीसदी के साथ यूपीआई सबसे आगे रहा। इसी के चलते आने वाले समय में अब साइबर सुरक्षा पर भी फोकस रहेगा।
7. बचत : बहुत से लोगों के बाद तो कोई सेविंग नहीं थी। उन्होंने कभी सोच नहीं कि लॉकडाउन लग जाएगा और नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा। हालांकि ऐसे भी कई लोग थे जिनके पास नगद पैसा या रुपया बिल्कुल ही नहीं था। कई लोगों के पास नगदी के साथ ही भविष्य के लिए बचाकर रखी जाने वाली सेविंग भी नहीं थी। ऐसे में यह सबसे बड़ा सबक रहा कि संकट काल में हमारे पास बैंक, वॉयलेट के अलावा जेब में भी रुपया होना चाहिए और यह तभी संभव होगा जबकि हम बचत करेंगे। अब लोग फालतू खर्च नहीं करेंगे। अब लोग फालतू ही घूमने-फिरने और रेस्टोरेंट में खाने से कतराएंगे। मंगनी, शादी आदि मांगलिक कार्य और अन्य प्रोग्राम भी कम खर्चिले हो सकते हैं। अधिकतर लोग अब अपनी बचत पर ध्यान देंगे। बचत बढ़ने का अर्थ यह है कि लोग कम खर्च करेंगे। बहुत जरूरी आवश्यकताओं की वस्तुओं का संग्रह करेंगे।
8. वायरस की मौत सबसे बतदर : इस वर्ष लोगों ने सबसे बड़ा सबक यह लिया कि वायरस से किसी अपने या खुद का मरना सड़क पर मरने से भी बुरी मौत है। यह एक ऐसी मौत है जिसमें अपनों का साथ नहीं होता। शमशान या कब्रिस्तान में हमें अपने नहीं ले जाते बल्कि नगर निगम के कर्मचारी ले जाते हैं। कई लोग अस्पताल में अकेले मर गए और डॉक्टर एवं नर्स तक को इसका पता नहीं चला। आखिरी वक्त में अपनो का साथ नहीं। वे लोग भी साथ छोड़ जाते हैं जिनके लिए आपने अपना खून पसीना बहा दिया। इसलिए 2020 उन लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक है जिन्होंने इस वायरस की भयावहता को गंभीरता से लिया है और इसके परिणाम को समझा है। जिन्होंने इस वायरस को हल्ले में लिया वे या तो इस दुनिया में नहीं हैं या इस वायरस के कारण वे अभी तक जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह कि ऐसे भी लोग हैं जो वायरस से तो मुक्ति हो गए परंतु दूसरी बीमारी में उलझ गए हैं।
9. सेहत के प्रति बढ़ी जागरूकता और क्वारंटाइन का महत्व समझा : वर्ष 2020 ने यह सिखाया कि शरीर को तंदुरुस्त या फिट रखना कितना जरूरी है। इम्युनिटी पावर को बढ़ाकर रखना भी कितना जरूरी है। इसीलिए अब लोगों में अपनी सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसके लिए योग, आयुर्वेद, ध्यान और पौष्टिक भोजन को लोगों ने बहुत अपनाया है। वर्ष 2020 यह सबक दे गया है कि हमें अब अपनी सेहत को लेकर हर दम सतर्क रहना चाहिए। मोटापा और इसे होने वाले रोग से दूर रहना कितना जरूरी है। लोग पहले की अपेक्षा खुद को ज्यादा स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। घर में ही कसरत, योग के अलावा कुछ ऐसा कार्य भी करने लगे हैं जो कि रचनात्मक है। लोगों को अब यह तो समझ आ ही गया है कि किसी भी बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है क्वारंटाइन हो जाना। लॉकडाउन के जितने नुकसान है उतने ही फायदे हैं। दुनिया अब उन फायदों पर ध्यान देंगे जो लॉकडाउन से मिल सकते हैं। इससे हमारी धरती अपने स्वरूप में पुन: लौट आई है।
10. समय, कर्म और योजना की कीमत समझी : बहुत से लोग हैं जो कभी भी उठ जाते है और कभी भी सो जाते हैं। कभी भी खा लेते हैं और कभी भी कहीं भी घूमने निकल जाते हैं। उनके जीवन में समय का कोई प्रबंधन नहीं होता है। वे बेतरतीब भरा जीवन जीते हैं। जिसके जीवन में समय का प्रबंधन नहीं है वह बस अच्छे भविष्‍य के सपने ही देखा करता है। अत: जीवन में उठने का, पूजा करने का, खाने का, कार्य करने का सोने का और लक्ष्य को भेदने का नियम जरूर बनाएं। समय को व्यर्थ ना बहाएं क्योंकि जीवन है बहुत छोटा सा और समय है बहुत ही खोटा सा।
चाणक्य ने एक बार शायद कहीं पर कहा था कि कल मिलने वाले मोर की अपेक्षा आज मिलने वाला कबूतर मुझे ज्यादा पसंद होगा। मतलब यह कि आज आपको जो मिल रहा है उसे लपक लो, कल के भरोसे मत रहो कि कल इससे अच्छा मिलेगा तो आज ये जो मिल रहा है उसे छोड़ दो। उदाहणार्थ की कल सोना अच्छी कीमत में बिक जाएगा या प्लाट अच्छी कीमत में बिकेगा। कल नौकरी अच्छी मिलेगा अभी मैं ये नौकरी क्यों करूं? मैं तो इससे बड़ी नौकरी चाहता हूं। भूख तो आज लगी है और खाओगे कल तो तब तक तो भूख ही मर जाएगी या अभी जो खाना परसा है उस पर किसी ओर का अधिकार हो जाएगा तब क्या करोगे। इसलिए कल की चिंता करो परंतु आज को चूको मत।
जीवन के किसी भी क्षेत्र में बेहतर रणनीति आपके जीवन को सफल बना सकती है और यदि कोई योजना या रणनीति नहीं है तो समझो जीवन एक अराजक भविष्य में चला जाएगा जिसके सफल होने की कोई गारंटी नहीं। यह ऐसा दौर है कि अब आपके दिमाग में मास्टर प्लान होना जरूरी है। यदि आपको जीवन के किसी भी क्षे‍त्र में जीत हासिल करना हो और यदि आपकी रणनीति और उद्देश्य सही है तो आपको जीतने से कोई रोक नहीं सकता।

जिंदकी भाग्य से नहीं चलती। भाग्य भी तभी चलता है जब कर्म का चक्का घुमता है। इंसान की जिंदगी जन्म और मौत के बीच की कड़ी-भर है। यह जिंदगी बहुत छोटी है। कब दिन गुजर जाएंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा इसलिए प्रत्येक दिन का भरपूर उपयोग करना चा‍हिए। कुछ ऐसे भी कर्म करना चाहिए, जो आपके अगले जीवन की तैयारी के हों। अत: इस जीवन में जितना हो सके, उतने अच्छे कर्म कीजिए। एक बार यह जीवन बीत गया, तो फिर आपकी प्रतिभा, पहचान, धन और रुतबा किसी काम नहीं आएंगे।



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