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रूस में पुतिन के दुश्मनों की क्यों हो रही संदिग्ध मौतें, प्रिगोझिन से लेकर नवलनी तक, क्या है मौतों का रहस्य?
Why Vladimir Putin enemies being killed in Russia: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन Vladimir Putin की जिंदगी रहस्यमयी रही है। उनकी राजनीति और रूस में होने वाली तमाम घटनाएं भी रहस्यमयी ही रही हैं। यहां तक कि पुतिन के शासन में कुछ ऐसी मौतें हुई हैं, जिनके बारे में आज तक कोई पता नहीं लगा सका है।
रूस में पत्रकार से लेकर जासूस तक कई संदिग्ध मौतें शामिल हैं। हाल ही में एक और शख्स की मौत हुई है, जिनका नाम है एलेक्सी नवलनी (Alexei Navalny)। नवलनी रूस में विपक्षी नेता थे। जानते हैं आखिर क्यों रूस में हो रही हैं संदिग्ध मौतें और क्यों आ रहा है राष्ट्रपति पुतिन का नाम।
एलेक्सी नवलनी : पहले भी जहर दिया गया था : एलेक्सी नवलनी की हाल ही में रूस में संदिग्ध मौत हो गई है। नवलनी रूस में विपक्षी नेता थे। बता दें कि कुछ समय पहले भी साइबेरिया में उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। लेकिन इस बार वे बच नहीं सके। एलेक्सी नवलनी के जेल में मरने की खबर है। वह लंबे समय से जेल में थे। कहा जा रहा है कि यमालो-नेनेट्स की जेल में उनकी मौत हुई है।
क्यों हुई थी नवलनी को जेल : जब नवलनी की मौत हुई उस समय वे जेल में थे। दरअसल, जनवरी 2021 में रूस लौटने पर नवलनी को 2013 में उनके खिलाफ लाए गए धोखाधड़ी के एक मामले में उन्हें जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध के खिलाफ जेल से अभियान भी चलाया था और युद्ध का सार्वजनिक विरोध किया था।
प्रिगोझिन : वैगनर चीफ की प्लेन क्रैश में मौत : रूस में संदिग्ध मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है, जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन के किसी आलोचक की इस तरह से संदिग्ध मौत हुई है। कुछ ही दिनों पहले वैगनर चीफ प्रिगोझिन prigozhin death की एक प्लेन हादसे में मौत हो गई। बता दें कि वैगनर ग्रुप के मुखिया प्रिगोझिन ने रूस के खिलाफ एक असफल विद्रोह का प्रयास किया था। उन्होंने तब मास्को की ओर कूच करने का ऐलान कर पुतिन के शासन को हिला दिया था। इस घटना के बाद से अमेरिकी खुफिया एजेंसिया समेत तमाम एक्सपर्ट दावा कर रहे थे कि प्रिगोझिन के साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है और अंतत: उनकी मौत हो गई।
एलेक्जेंडर लित्विनेको की मौत : पुतिन के एक ऐसे ही विरोधी एलेक्जेंडर लित्विनेको को लंदन में साल 2006 में जहर देकर मारा गया था। बाद में ब्रिटिश जांच में भी यही बात आई थी कि रूसी एजेंट्स ने लित्विनेको को पुतिन की मर्जी से मौत के घाट उतारा था।
सर्गेई स्क्रिपल को दिया जहर : रूस के पूर्व मिलिट्री इंटेलीजेंस अफसर सर्गेई स्क्रिपल को भी जहर देकर मार दिया गया था। इसी तरह दो लेखकों दिमित्री बाइकोव और पायोत्र वर्जिलोव को भी जहर दिया गया। इसी तरह क्रेमलिन विरोधी तीन रूसी पत्रकारों को अन्य देशों में जहर देकर मार डाला गया था।
अन्ना पोलिटकोव्स्काया : साल 2006 में अन्ना पोलिटकोव्स्काया, जिसने ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन को लेकर कई खबरें लिखी थीं, उन्हें भी मॉस्को में घर के बाहर गोली मार दी गई थी।
बोरिस नेम्तसोव : कुछ इसी तरह से एक विपक्षी नेता बोरिस नेम्तसोव को भी सेंट्रल मॉस्को में गोलियों से भून दिया गया था। यह घटना साल 2015 की है। वह राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के कार्यकाल में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर रह चुके थे।
बोरिस बेरेजोव्स्की : साल 2013 में बोरिस बेरेजोव्स्की भी अपने घर के बाथरूम में फंदे से लटकते पाया गया। बोरिस पहले क्रेमलिन के इनसाइडर थे जो बाद में पुतिन के आलोचक हो गए थे।
मिखाइल लेसिन : इसी तरह क्रेमलिन के एक अन्य इनसाइडर मिखाइल लेसिन साल 2015 में वॉशिंगटन डीसी के एक होटल के कमरे में मृत पाए गए थे। लेसिन कभी पुतिन को उभारने वाली शख्सियतों में शुमार थे।
किरिल स्ट्रेमॉसोव : सबसे खतरनाक मौत किरिल स्ट्रेमॉसोव की रही जो यूक्रेन के खेरासन प्रांत रूस द्वारा डिप्टी गवर्नर नियुक्त किए गए थे। उनकी मौत एक कार हादसे में हुई थी। स्ट्रेमॉसोव अपने मुखर बयानों और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं के लिए जाने जाते थे। एक ऐसे ही वीडियो में स्ट्रेमॉसोव ने रूस के रक्षामंत्री को कहा था कि वह खुद को गोली मार लें। माना जा रहा है कि स्ट्रेमॉसोव के इस बयान के बाद रूसी सरकार उनसे छुटकारा पाने की फिराक में थी। रूसी सरकार के एक अन्य महत्वपूर्ण विपक्षी नेता व्लादिमीर कारा-मुर्जा को भी 2015 और 2017 में जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी।
भारत में 2 मौतें : बता दें कि भारत में भी दो रूसी लोगों की संदिग्ध मौत हो गई थी। दोनों की मौत होटल के कमरे में गिरने से हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पुतिन के आलोचक माने जाते थे। दोनों की मौत के बारे में आज तक कोई खुलासा नहीं हो सका।
मौत ऐसी कि सबूत तक न मिले : दरअसल, रूस में पुतिन विरोधियों को मौत के घाट उतारने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। ये तरीके ऐसे होते हैं, जिससे मौत संदिग्ध बन जाए और कोई सबूत न मिले। कोई हादसे में मरा। कोई होटल के कमरे से गिरा तो किसी को अज्ञात लोगों ने गोली मारी। ज्यादातर लोगों को जहर दिया गया। कुछ मौतें सडक हादसे में हुईं तो किसी ने घर में फांसी लगा ली। इन सभी मौतों के बारे में आज तक किसी को पता नहीं चला। न कोई सबूत ही मिला। अगर कोई एक कॉमन बात इन मरने वालों में थी तो वो यह थी कि सभी व्लादिमिर पुतिन के आलोचक या दुश्मन थे।
Written by Navin Rangiyal
रूस में पत्रकार से लेकर जासूस तक कई संदिग्ध मौतें शामिल हैं। हाल ही में एक और शख्स की मौत हुई है, जिनका नाम है एलेक्सी नवलनी (Alexei Navalny)। नवलनी रूस में विपक्षी नेता थे। जानते हैं आखिर क्यों रूस में हो रही हैं संदिग्ध मौतें और क्यों आ रहा है राष्ट्रपति पुतिन का नाम।
एलेक्सी नवलनी : पहले भी जहर दिया गया था : एलेक्सी नवलनी की हाल ही में रूस में संदिग्ध मौत हो गई है। नवलनी रूस में विपक्षी नेता थे। बता दें कि कुछ समय पहले भी साइबेरिया में उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। लेकिन इस बार वे बच नहीं सके। एलेक्सी नवलनी के जेल में मरने की खबर है। वह लंबे समय से जेल में थे। कहा जा रहा है कि यमालो-नेनेट्स की जेल में उनकी मौत हुई है।
प्रिगोझिन : वैगनर चीफ की प्लेन क्रैश में मौत : रूस में संदिग्ध मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है, जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन के किसी आलोचक की इस तरह से संदिग्ध मौत हुई है। कुछ ही दिनों पहले वैगनर चीफ प्रिगोझिन prigozhin death की एक प्लेन हादसे में मौत हो गई। बता दें कि वैगनर ग्रुप के मुखिया प्रिगोझिन ने रूस के खिलाफ एक असफल विद्रोह का प्रयास किया था। उन्होंने तब मास्को की ओर कूच करने का ऐलान कर पुतिन के शासन को हिला दिया था। इस घटना के बाद से अमेरिकी खुफिया एजेंसिया समेत तमाम एक्सपर्ट दावा कर रहे थे कि प्रिगोझिन के साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है और अंतत: उनकी मौत हो गई।
एलेक्जेंडर लित्विनेको की मौत : पुतिन के एक ऐसे ही विरोधी एलेक्जेंडर लित्विनेको को लंदन में साल 2006 में जहर देकर मारा गया था। बाद में ब्रिटिश जांच में भी यही बात आई थी कि रूसी एजेंट्स ने लित्विनेको को पुतिन की मर्जी से मौत के घाट उतारा था।
सर्गेई स्क्रिपल को दिया जहर : रूस के पूर्व मिलिट्री इंटेलीजेंस अफसर सर्गेई स्क्रिपल को भी जहर देकर मार दिया गया था। इसी तरह दो लेखकों दिमित्री बाइकोव और पायोत्र वर्जिलोव को भी जहर दिया गया। इसी तरह क्रेमलिन विरोधी तीन रूसी पत्रकारों को अन्य देशों में जहर देकर मार डाला गया था।
अन्ना पोलिटकोव्स्काया : साल 2006 में अन्ना पोलिटकोव्स्काया, जिसने ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन को लेकर कई खबरें लिखी थीं, उन्हें भी मॉस्को में घर के बाहर गोली मार दी गई थी।
बोरिस नेम्तसोव : कुछ इसी तरह से एक विपक्षी नेता बोरिस नेम्तसोव को भी सेंट्रल मॉस्को में गोलियों से भून दिया गया था। यह घटना साल 2015 की है। वह राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के कार्यकाल में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर रह चुके थे।
बोरिस बेरेजोव्स्की : साल 2013 में बोरिस बेरेजोव्स्की भी अपने घर के बाथरूम में फंदे से लटकते पाया गया। बोरिस पहले क्रेमलिन के इनसाइडर थे जो बाद में पुतिन के आलोचक हो गए थे।
किरिल स्ट्रेमॉसोव : सबसे खतरनाक मौत किरिल स्ट्रेमॉसोव की रही जो यूक्रेन के खेरासन प्रांत रूस द्वारा डिप्टी गवर्नर नियुक्त किए गए थे। उनकी मौत एक कार हादसे में हुई थी। स्ट्रेमॉसोव अपने मुखर बयानों और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं के लिए जाने जाते थे। एक ऐसे ही वीडियो में स्ट्रेमॉसोव ने रूस के रक्षामंत्री को कहा था कि वह खुद को गोली मार लें। माना जा रहा है कि स्ट्रेमॉसोव के इस बयान के बाद रूसी सरकार उनसे छुटकारा पाने की फिराक में थी। रूसी सरकार के एक अन्य महत्वपूर्ण विपक्षी नेता व्लादिमीर कारा-मुर्जा को भी 2015 और 2017 में जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी।
भारत में 2 मौतें : बता दें कि भारत में भी दो रूसी लोगों की संदिग्ध मौत हो गई थी। दोनों की मौत होटल के कमरे में गिरने से हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पुतिन के आलोचक माने जाते थे। दोनों की मौत के बारे में आज तक कोई खुलासा नहीं हो सका।
मौत ऐसी कि सबूत तक न मिले : दरअसल, रूस में पुतिन विरोधियों को मौत के घाट उतारने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। ये तरीके ऐसे होते हैं, जिससे मौत संदिग्ध बन जाए और कोई सबूत न मिले। कोई हादसे में मरा। कोई होटल के कमरे से गिरा तो किसी को अज्ञात लोगों ने गोली मारी। ज्यादातर लोगों को जहर दिया गया। कुछ मौतें सडक हादसे में हुईं तो किसी ने घर में फांसी लगा ली। इन सभी मौतों के बारे में आज तक किसी को पता नहीं चला। न कोई सबूत ही मिला। अगर कोई एक कॉमन बात इन मरने वालों में थी तो वो यह थी कि सभी व्लादिमिर पुतिन के आलोचक या दुश्मन थे।
Written by Navin Rangiyal
