अधिकमास (जिसे मलमल या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) में आने वाली पद्मिनी एकादशी का व्रत बेहद खास और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से यज्ञों के समान पुण्य मिलता है। यदि आप इस व्रत को रखने की सोच रहे हैं, तो इसके 5 सबसे जरूरी नियम और इसकी सरल विधि नीचे दी गई है।
पद्मिनी एकादशी व्रत के 5 जरूरी नियम
1. दशमी तिथि से ही नियमों का पालन (तामसिक भोजन का त्याग)
एकादशी व्रत का नियम एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की शाम से ही शुरू हो जाता है।
दशमी के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन न करें।
इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, मसूर की दाल और चावल का पूरी तरह त्याग कर दें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
2. निराहार या फलाहार का संकल्प
एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही व्रत का प्रकार चुनें- चाहे आप निर्जला (बिना पानी के), जलाहार (केवल पानी पीकर) या फलाहार (फल और दूध) रखना चाहते हों।
जबरदस्ती शरीर को कष्ट देकर व्रत न रखें, क्योंकि भगवान भाव के भूखे होते हैं।
3. कांसे के बर्तन और चावल का निषेध
एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित होता है।
इस दिन भोजन या फलाहार के लिए कांसे के बर्तनों का उपयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। मिट्टी, सोने, चांदी या स्टील के बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है।
4. वाणी पर नियंत्रण और रात्रि जागरण
एकादशी व्रत सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि मन को शुद्ध रखने का पर्व है। इस दिन किसी की बुराई (निंदा), गुस्सा या झूठ बोलने से बचें।
विष्णु पुराण के अनुसार, एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। रात में भगवान विष्णु के भजनों, मंत्रों (जैसे: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का कीर्णन या भगवद्गीता का पाठ करना चाहिए।
5. द्वादशी को सही समय पर पारण (व्रत खोलना)
व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब उसका पारण सही समय पर किया जाए।
द्वादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान और पूजा करने के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें। इसके बाद ही शुभ मुहूर्त में स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें।
व्रत रखने की सरल विधि
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सुबह की पूजा: एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
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संकल्प: भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने हाथ में जल और अक्षत (खड़े अन्न के बजाय तिल का उपयोग करें) लेकर व्रत का संकल्प लें।
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पूजन सामग्री: भगवान विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें। (याद रखें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।
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कथा का श्रवण: पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें।
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शाम की आरती: संध्याकाल में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर आरती करें।
विशेष टिप: चूंकि यह अधिकमास की एकादशी है, इसलिए इस दिन श्री कृष्ण या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से सामान्य एकादशी की तुलना में कई गुना अधिक फल मिलता है।