ग्वादर पर गदर, मोदी का दोहरे मोर्चे पर लड़ाई का इरादा

Last Updated: सोमवार, 22 अगस्त 2016 (14:51 IST)
इतिहास में ग्वादर : तंत्रता से पहले ही ब्रिटेन की ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेवीगेशन कंपनी के जहाजों ने ग्वादर और पसनी की बंदरगाहों को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। 1863 में ग्वादर में पहला तार-घर (टेलीग्राम ऑफिस) बना और पसनी में भी एक तार-घर बनाया गया। 1894 को ग्वादर में पहला डाकखाना खुला जबकि 1903 को पसनी और 1904 को ओरमाडा में डाकखाने बनाए गए। 1947 में जब भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन हुआ तो भारत और पाकिस्तान बने लेकिन ग्वादर और इस के आसपास का इलाका कलात राज्य में शामिल था।
 
आज का ग्वादर : आज का ग्वादर का एक छोटा-सा शहर है जिसकी आबादी सरकारी गणना के अनुसार एक लाख के आसपास है। इस शहर को समुद्र ने तीन तरफ से अपने घेरे में लिया हुआ है और हर वक्त समुद्री हवाएं चलती रहती हैं जिसकी वजह से यह एक खूबसूरत नजारा पेश करता है। वैसे ग्वादर का मतलब 'हवा का दरवाजा' है। 'ग्वा' का अर्थ 'हवा' और 'दर' का मतलब 'दरवाजा' है। गहरे समुद्र के अलावा शहर के इर्द-गिर्द मिट्टी की बुलंद ऊंची चट्टानें मौजूद हैं। इस शहर के वासियों की ज्यादातर गुजर बसर मछली के शिकार से होती है और अन्य जरूरतें पड़ोसी देशों ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान से पूरी होती हैं।
 
ग्वादर शहर के भविष्य में एक अंतरराष्ट्रीय शहर बनने की संभावनाएं हैं और ना सिर्फ बल्कि पूरे पाकिस्तान के आर्थिक विकास के लिहाज यह एक अहम शहर बन जाएगा। यहां का  बंदरगाह पाकिस्तान के अलावा चीन, अफगानिस्तान, मध्य एशिया के देशों जैसे ताजिकिस्तान, कजाकस्तान, अजरबैजान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और रूस के इस्तेमाल में आ सकता है जिससे पाकिस्तान को बहुत अधिक किराया मिलेगा। 
 
आधुनिक बंदरगाह : ग्वादर मकरान कोसल हाई-वे के जरिए कराची और बलूचिस्तान के अन्य तटीय शहरों से जुड़ा हुआ है। फील्ड मार्शल अय्यूब खान के दौर में ही ग्वादर में प्रसिद्ध बंदरगाह बनाने का मनसूबा बन गया था मगर पैसे की कमी और अन्य समस्याओं के चलते इस योजना पर काम शुरू ना हो सका। लेकिन जब अमेरिका ने तालिबानी हुकूमत को समाप्त करने के लिए अफगानिस्तान पर हमला किया तो इसके चार माह बाद पाकिस्तान और चीन ने मिल कर ग्वादर में इक्कीसवीं सदी की जरूरतों के अनुसार बंदरगाह बनाना शुरू कर दिया। चीनियों के इस शहर में आने के साथ ही शहर का महत्व कई गुना बढ़ गया। 
 
ग्वादर बंदरगाह फारस की खाड़ी, अरब सागर, हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी और इसी समुद्री पट्टी में स्थित तमाम बंदरगाहों से ज्यादा गहरा बंदरगाह होगा और इस में बड़े-बड़े मालवाही जहाज आसानी से लंगर गिरा सकेंगे जिन में ढाई लाख टन वजनी जहाज तक शामिल हैं। इस बंदरगाह के जरिए ना सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि अफगानिस्तान, चीन और मध्य एशिया के तमाम देशों से कारोबार होगा। बंदरगाह की गहराई 14.5 मीटर होगी। यह एक बड़ा और सुरक्षित बंदरगाह है।
 
'किले' में बदला ग्‍वादर बंदरगाह : 'किले' में बदला ग्‍वादर बंदरगाह : ग्‍वादर सिटी को चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का दक्षिणी हब माना जाता है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी, सघन चौकसी, नए चेक प्‍वाइंट और सेना के सुदृढ़ीकरण ने पाकिस्‍तान के ग्‍वादर बंदरगाह को 'किले' में तब्‍दील कर दिया है। चीन से आने वाले अरबों डॉलर के निवेश को बनाए रखने के लिए पाकिस्‍तान में शक्तिशाली सेना ने यह बदलाव किया है।
 
46 बिलियन डॉलर की राशि जुटाना चुनौती : सड़क कॉरिडोर, रेलवे और उत्‍तर पूर्व चीन से पाकिस्‍तान के अरब सागर तक पाइप लाइन के लिए 46 बिलियन डॉलर की राशि जुटाना उस देश के लिए बड़ी चुनौती है जहां आतंकी और इस्‍लामी कट्टरपंथी लगातार खतरा बने हुए हैं। सशस्‍त्र बलों और आंतरिक मंत्रालय ने ग्‍वादर के लिए सैकड़ों अतिरिक्‍त सैनिक और पुलिस के जवान तैनात किए हैं। ग्‍वादर में क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी जफर खान ने बताया, 'जल्‍द ही हम चीनियों की अलग से सुरक्षा के लिए 700 से 800 पुलिस के जवानों की व्‍यवस्‍था करेंगे। बाद में यहां पर नई सुरक्षा डिवीजन की तैनाती की जाएगी।
 
विदेशी वर्करों-अधिकारियों की सुरक्षा पर खास ध्‍यान : करीब एक लाख लोगों के इस कस्‍बे के एक वरिष्‍ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए अस्‍थायी उपाय के तहत 400 से 500 अतिरिक्‍त सैनिकों की तैनाती की जा रही है। हाल की ग्‍वादर यात्रा के दौरान चीनी आगंतुकों की लेकर आने वाली एसयूवी को पुलिस की दो कार और सेना का एक वाहन अपने घेरे में लिए हुए थे। विदेशी कामगारों और अधिकारियों को ग्‍वादर में सुरक्षा प्रदान करने के लिए इस कवायद को समझा जा सकता है। गौरतलब है कि पिछले 15 सालों में पाकिस्‍तान में चीन के निवेश में खासा इजाफा हुआ है।
 
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