अग्निपथ योजना पर निबंधः कैसे बनें अग्निवीर और क्या हैं इसके फायदे-नुकसान

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भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती को लेकर भारत सरकार एक योजना लेकर आई है जिसका नाम है अग्निपथ योजना। इस योजना के द्वारा सेना में भर्ती होने का पूरा प्रारूप ही बदल गया है। कई लोगों को इसे लेकर कई शंकाएं और संदेह है तो कई इसे ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं। आइए जानते हैं कि अग्निपथ योजना से सम्बंधित जानकारी को -

क्या है अग्निपथ योजना -
अग्निपथ योजना युवाओं के लिए एक प्रकार की स्किम है जिसमें युवाओं को 4 साल के लिए सेना (नौसेना, थल सेना और वायुसेना) में सेवा देने का अवसर मिलेगा। 4 साल बाद चयनित हुए जवानों में से 25 प्रतिशत को परमानेंट कर दिया जाएगा और बाकी लोगों को सेवानिवृत्त (रिटायर) कर दिया जाएगा।

क्या सुविधाएं मिलेगी -
इस योजना में सेवानिवृत्त जवानों को पेंशन की सुविधा नहीं मिलेगी। पर इस 4 वर्ष के अल्प कार्यकाल में उन्हें प्रथम वर्ष 30 हजार, दूसरे वर्ष 33 हजार, तीसरे वर्ष 36,500 और अंतिम वर्ष 40 हजार रूपए प्रतिमाह का वेतन मिलेगा। इसी के साथ 48 लाख रूपए का इंश्योरेंस तो होगा ही साथ में 6 महीने की ट्रेनिंग भी रहेगी। यदि अपनी सेवा के दौरान जवान तो उसके परिवार को 1 करोड़ रूपए दिए जाएंगे और यदि वह दिव्यांग होता है तो उसे 44 लाख रूपए की राशि दी जाएगी। अग्निवीरों को सेवानिवृत्ति के बाद 'स्किल सर्टिफिकेट' भी मिलेगा जिससे उन्हें भविष्य में दूसरी नौकरी में चुने जाने में प्राथमिकता मिलेगी। इन रिटायर हुए अग्निवीरों को जो सेवनिधि पैकेज मिलेगा उसपर इनकम टैक्स भी नहीं लगेगा। इसी के साथ उन्हें
राशन, पोशाक, यात्रा इत्यादि का गुजारा-भत्ता भी मिलेगा। कुल-मिलाकर अग्निवीरों को 12 लाख रूपए मिलेंगे जिसे वह रिटायरमेंट के बाद प्राप्त करेंगे।

कैसे बनेंगे अग्निवीर -
अग्निवीर बनने के लिए आपको 17 वर्ष से 23 वर्ष तक की आयु सीमा में होना अनिवार्य होगा। आपका कम से कम 10वी उत्तीर्ण करना जरूरी है। इस वर्ष 46000 अग्निवीरों का चयन होगा। यह सैन्य भर्ती वर्ष में 2 बार होगी।
अग्निवीर बनने के फायदे -
1 21-23 की उम्र में हम अपने करियर के बारे में सोचते हैं या बस पढाई में लगे रहते हैं, पर यदि हम अग्निवीर बनकर रिटायर होते हैं तो हमारे पास 12 लाख रूपए की पूंजी होगी। जिससे हम अपना कोई खोल सकते हैं और हमें आसानी से लोन भी मिलेगा। सोचिए कितने युवाओं की 21-23 की उम्र में 12 लाख की पूंजी होती है ?

2 कई बार यह प्रश्न आता है कि अग्निपथ योजना से रिटायर होने के बाद हमें नौकरी कैसे मिलेगी?, इसके लिए कई राज्य सरकारों ने अग्निवीरों को नौकरी देने का आश्वासन तो दिया ही है साथ में केंद्रीय सशत्र पुलिस बल, असम राइफल्स और अन्य दूसरे बलों में भी अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की बात की गई है।

3 हमें रिटायरमेंट के बाद अग्निवीर स्किल सर्टिफिकेट भी मिलेगा जिसके कारण हमें दूसरी अन्य नौकरियों में भी प्राथमिकता मिलेगी व हम भीड़ का हिस्सा नहीं होकर अपनी एक अलग पहचान रखेंगे।
4 एक और प्रश्न हमारे मन में आता है कि यदि हमें आगे और पढ़ना है या रूचि के विषय में डिग्री लेना है तो क्या करेंगे ? तो जान लीजिए कि अग्निवीरों को इंजीनियरिंग, कानून व्यवस्था जैसे महत्वपुर्ण जैसे क्षेत्रों में काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी जिसके कारण वह स्किल्ड हो जाएंगे और आगे की उनकी राह सरल रहेगी। इसी के साथ सेवा के दौरान मिलने वाले कौशल प्रशिक्षण को शिक्षा मंत्रालय स्नातक की मान्यता भी देगा। इस सेवाकाल के दौरान मिले प्रशिक्षण को इग्नू द्वारा तैयार विशेष स्नातक कार्यक्रम के तहत 50 प्रतिशत क्रेडिट मिलेगा और अन्य 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम में मिलेगा।

5 जब हम रिटायर होकर बाहर निकालेंगे तो हमारे पास अनुशासन, प्रशिक्षण,गतिशीलता और कुशलता होगी जिसका अन्य युवाओं में उस उम्र में अभाव होता है। ऐसे में हमारा हम उम्र में ही चरित्र निर्माण हो सकेगा।
अग्निवीर बनने के नुकसान -
अग्निपथ योजना के नुकसान की बात करें तो कई लोगों के अलग-अलग मत है।
एक मत यह है कि इस योजना से भाड़े के सैनिक बनेंगे, जिनमें देश के प्रति सेवा और समर्पण का अभाव अधिक होगा। एक सैनिक का मूल उद्देश्य देशभक्ति होना चाहिए, पैसा कमाना नहीं।

दूसरा मत है कि मात्र 6 महीने की ट्रेनिंग से सैनिक नहीं बनता, उसके लिए उसे ऑपरेशन में भाग लेना होता है। साढ़े तीन वर्ष के सेवाकाल में उसमें एक फौजी का जज्बा नहीं आएगा। इतनी कम ड्यूटी में कोई भी सैनिक परिपक्व नहीं होता। ऐसे में सेना में मैच्योरिटी नहीं रहेगी।
तीसरा मत है कि यदि कोई अग्निवीर रिटायर होकर भ्रमित होकर देश विरोधी तत्वों से जुड़ जाता है तो ऐसे में हमारा ही अस्त्र हमारे ऊपर चलने जैसी नौबत आ जाएगी।

एक मत यह भी है कि इस योजना से समाज का सैन्यीकरण हो सकता है। 21 की उम्र को कच्ची उम्र ही माना जाता है। यदि कोई भी अग्निवीर भटकता है और समाज का अहित करता है तो उसकी जिम्मेदारी सेना की ही होगी।
निष्कर्ष -
कोई भी योजना जब आती है तो उसे लेकर मतभेद होते ही है। इसलिए जब तक इसके इम्प्लीमेंटेशन होने के बाद की स्थिति नहीं देख लेते तब तक इसको अच्छा-बुरा कहना गलत होगा। अभी हमें वेट एंड वॉच की नीति का पालन करना चाहिए। कोई भी योजना आती है तो समय के साथ उसे अच्छा करने के लिए उचित कदमों के रूप में बदलाव किए जाते हैं तो आशा है कि देश की सुरक्षा से जुडी इस योजना में भी उचित बदलाव भविष्य में देखे जा सकते हैं।



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