जवान भारत की जीत का जश्न
- पंकज जोशी
हल्ला बोल! यह शब्द सोमवार को हर एक भारतीय क्रिक्रेट दीवाने के दिल में यही गूँज रहे थे और जोहानसबर्ग के मैदान पर भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ी भी पहले ट्वेंटी-20 के फ़ाइनल संघर्ष में एक-दूसरे पर हल्ला बोल रहे थे, लेकिन जोश में होश न खोने की कला भारतीय खिलाड़ी पिछले कुछ मैचों के अनुभव से सीख चुके थे। और अंत में जीत होश की ही हुई। भारत की युवा ब्रिगेड ने विश्व की पहली ट्वेंटी-20 विश्व विजेता टीम होने का सेहरा अपने सिर बँधवा लिया।
कप्तान धोनी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि यदि आपको विश्वास है कि आप कुछ कर सकते हैं, और आप यही बात मैदान पर दोहराते रहते हैं तो अधिकांश समय में आप वह कार्य कर ही जाएँगे। मैंने और मेरे साथियों ने भी यही किया।
युवा टीम के इस युवा कप्तान ने यह साबित कर दिया कि वे केवल ऊँचे-ऊँचे छक्के ही नहीं लगा सकते, बल्कि टीम के हौंसलों को भी आसमान छुआ सकते हैं। अपने पहले इम्तिहान में धोनी केवल पास ही नहीं हुए, पर उन्होंने टीम को आगे भी आगे बढ़ाने की अपनी कूवत सिद्ध कर दी है।
इस विश्वकप के लिए युवाओं की टोली भेजने का चयनकर्ताओं का जुँआ काम कर गया। और टीम के तरकश का हर तीर निशाने पर बैठा। इस टीम में कुछ नामों को छोड़कर सभी खिलाड़ी ऐसे थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नाम की मुहर लगानी बाकी थी।
इस टीम के पास खोने के लिए कुछ नहीं था और पाने को बहुत कुछ। यही कारण है कि इस टीम को वर्तमान की दिग्गज टीमों इंग्लैंड, दक्षिण अफ़्रीका और चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के सामने भी हार का डर नहीं रहा। इसी डर से न डरने को टीम ने अपनी ताकत बनाकर विपक्षी टीमों को बेहाल कर दिया।
विश्वकप में बुरी तरह परास्त होकर लौटी एशिया की दो इनक्रेडिबल टीमें भारत और पाकिस्तान के बीच फ़ाइनल मुक़ाबले का रोमांच दुनिया भर में रहा। अंतत: इस मुक़ाबले ने सबकी उम्मीदों को पूरा भी कर दिया। ये ठीक वैसा ही रोमांच था जब क्रिकेट से तौबा करने वाली घरेलू महिलाएँ भी हर गेंद के बाद पूछ रहीं थीं कि हम जीत गए क्या? पर अंतिम गेंद तक जवाब किसी के पास नहीं था।
प्रसिद्ध और प्रख्यात क्रिकेट विश्लेषकों और आलोचकों के पास भी नहीं। सबकी नज़रें बस जोगिंदर शर्मा और मिसबाह उल-हक के बीच फ़ेंकी जाने वाली गेंद पर टिकी थीं। जोंगिंदर पहले भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ दाँव खेल चुके थे। दोनों ही खिलाड़ी युवा थे, जज़्बे से भरपूर थे लेकिन कप्तान के भरोसे के दम पर जोगिंदर ये बाजी मार ले गए।
देश के क्रिकेटप्रेमियों को जुनूनी कहा जाता है। मैच जीतने का यही जुनून कल देश भर की सड़कों और चौराहों पर भी दिखा। और सब जानते हैं कि ये जुनून बेवजह नहीं था। यह जोश था विश्वविजेता टीम कहलाने का, यह ख़ुशी थी, 24 साल बाद इतिहास दोहराने की, ये दीवानगी थी क्रिकेट जगत में फिर से छा जाने की।
कल की रात वाकई देशभक्ति की रात थी, जहाँ फ़िज़ा में वंदे मातरम्, जय हिंद, भारत माता की जय की गूँज सारा क्रिकेट जगत सुन रहा था। इतने बुलंद नारे तो संभव है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्रता दिवस पर भी नहीं लग सकते थे।
वेस्टइंडीज़ में हुए विश्वकप से खाली हाथ लौटी टीम इंडिया इस बार वर्ल्डकप के साथ लौटेगी और कोच के होने का सवाल फिर से उठाया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ होने वाली श्रृंखला की खींचतान भी होगी।
नए कप्तान और युवा जाँबाज़ों का सम्मान किया जाएगा। तमाम क्रिकेट आलोचक और प्रशंसक टीम की बेहतरी के लिए अपने-अपने विचार और सुझाव देने के लिए आतुर बैठे होंगे।
अभी तो विश्व विजेता बनी भारतीय टीम के ऐसे प्रदर्शन और विजयश्री से इस पूरा भारत झूम रहा है। यह समय विश्लेषण करने नहीं हो सकता। सभी केवल जश्न मनाना चाहते हैं, और इतिहास रचने की इस ख़ुशी को भरपूर जी लेना चाहते हैं।
हल्ला बोल! यह शब्द सोमवार को हर एक भारतीय क्रिक्रेट दीवाने के दिल में यही गूँज रहे थे और जोहानसबर्ग के मैदान पर भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ी भी पहले ट्वेंटी-20 के फ़ाइनल संघर्ष में एक-दूसरे पर हल्ला बोल रहे थे, लेकिन जोश में होश न खोने की कला भारतीय खिलाड़ी पिछले कुछ मैचों के अनुभव से सीख चुके थे। और अंत में जीत होश की ही हुई। भारत की युवा ब्रिगेड ने विश्व की पहली ट्वेंटी-20 विश्व विजेता टीम होने का सेहरा अपने सिर बँधवा लिया।
कप्तान धोनी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि यदि आपको विश्वास है कि आप कुछ कर सकते हैं, और आप यही बात मैदान पर दोहराते रहते हैं तो अधिकांश समय में आप वह कार्य कर ही जाएँगे। मैंने और मेरे साथियों ने भी यही किया।
युवा टीम के इस युवा कप्तान ने यह साबित कर दिया कि वे केवल ऊँचे-ऊँचे छक्के ही नहीं लगा सकते, बल्कि टीम के हौंसलों को भी आसमान छुआ सकते हैं। अपने पहले इम्तिहान में धोनी केवल पास ही नहीं हुए, पर उन्होंने टीम को आगे भी आगे बढ़ाने की अपनी कूवत सिद्ध कर दी है।
इस विश्वकप के लिए युवाओं की टोली भेजने का चयनकर्ताओं का जुँआ काम कर गया। और टीम के तरकश का हर तीर निशाने पर बैठा। इस टीम में कुछ नामों को छोड़कर सभी खिलाड़ी ऐसे थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नाम की मुहर लगानी बाकी थी।
इस टीम के पास खोने के लिए कुछ नहीं था और पाने को बहुत कुछ। यही कारण है कि इस टीम को वर्तमान की दिग्गज टीमों इंग्लैंड, दक्षिण अफ़्रीका और चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के सामने भी हार का डर नहीं रहा। इसी डर से न डरने को टीम ने अपनी ताकत बनाकर विपक्षी टीमों को बेहाल कर दिया।
विश्वकप में बुरी तरह परास्त होकर लौटी एशिया की दो इनक्रेडिबल टीमें भारत और पाकिस्तान के बीच फ़ाइनल मुक़ाबले का रोमांच दुनिया भर में रहा। अंतत: इस मुक़ाबले ने सबकी उम्मीदों को पूरा भी कर दिया। ये ठीक वैसा ही रोमांच था जब क्रिकेट से तौबा करने वाली घरेलू महिलाएँ भी हर गेंद के बाद पूछ रहीं थीं कि हम जीत गए क्या? पर अंतिम गेंद तक जवाब किसी के पास नहीं था।
प्रसिद्ध और प्रख्यात क्रिकेट विश्लेषकों और आलोचकों के पास भी नहीं। सबकी नज़रें बस जोगिंदर शर्मा और मिसबाह उल-हक के बीच फ़ेंकी जाने वाली गेंद पर टिकी थीं। जोंगिंदर पहले भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ दाँव खेल चुके थे। दोनों ही खिलाड़ी युवा थे, जज़्बे से भरपूर थे लेकिन कप्तान के भरोसे के दम पर जोगिंदर ये बाजी मार ले गए।
देश के क्रिकेटप्रेमियों को जुनूनी कहा जाता है। मैच जीतने का यही जुनून कल देश भर की सड़कों और चौराहों पर भी दिखा। और सब जानते हैं कि ये जुनून बेवजह नहीं था। यह जोश था विश्वविजेता टीम कहलाने का, यह ख़ुशी थी, 24 साल बाद इतिहास दोहराने की, ये दीवानगी थी क्रिकेट जगत में फिर से छा जाने की।
कल की रात वाकई देशभक्ति की रात थी, जहाँ फ़िज़ा में वंदे मातरम्, जय हिंद, भारत माता की जय की गूँज सारा क्रिकेट जगत सुन रहा था। इतने बुलंद नारे तो संभव है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्रता दिवस पर भी नहीं लग सकते थे।
वेस्टइंडीज़ में हुए विश्वकप से खाली हाथ लौटी टीम इंडिया इस बार वर्ल्डकप के साथ लौटेगी और कोच के होने का सवाल फिर से उठाया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ होने वाली श्रृंखला की खींचतान भी होगी।
नए कप्तान और युवा जाँबाज़ों का सम्मान किया जाएगा। तमाम क्रिकेट आलोचक और प्रशंसक टीम की बेहतरी के लिए अपने-अपने विचार और सुझाव देने के लिए आतुर बैठे होंगे।
अभी तो विश्व विजेता बनी भारतीय टीम के ऐसे प्रदर्शन और विजयश्री से इस पूरा भारत झूम रहा है। यह समय विश्लेषण करने नहीं हो सकता। सभी केवल जश्न मनाना चाहते हैं, और इतिहास रचने की इस ख़ुशी को भरपूर जी लेना चाहते हैं।

