पेट्रोलियम इंजीनियरिंग
कॉलेज के बाद 'तरल सोना' निकालिए
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अशोक जोशी इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए निम्नलिखित न्यूनतम योग्यता होना चाहिए। भूगर्भशास्त्र : भूगर्भशास्त्र (जियोलॉजी) में स्नातक अथवा (स्नातकोत्तर उपाधि)जियो-फिजिक्स : एक्सफ्लेरेशन जियोफिजिक्स में पाँच वर्षीय इंटिग्रेटेड कोर्स। जियोलॉजी तथा जियो फिजिक्स में एम.टेक भी किया जा सकता है।पेट्रोलियम इंजीनियरिंग : पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बीई या बी.टेक।ये भी हैं योग्य* प्रोडक्शन या इंडस्ट्रीयल इंजीनियरिंग : बी.ई.* सिविल इंजीनियरिंग : बी.ई./बी.टेक या एम.ई./एम.टेक* मेकेनिकल इंजीनियरिंग : बी.ई. या एम.ई.* इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग : इंस्ट्रुमेंटेशन में बी.ई. या बी.टेक* केमिकल इंजीनियरिंग : केमिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. या एम.ई.* इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग : इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.ई.एमई स्तर पर कोई भी कंट्रोल और इंस्ट्रुमेंटेशन में विशेष अध्ययन कर सकता है।भारत में जिन क्षेत्रों का तेजी से विकास हो रहा है, पेट्रोलियम और ऊर्जा उनमें से एक है। देश में इन संसाधनों की भारी माँग है तथा माँग को दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में खूब निवेश हो रहा है। सरकार ऑइल बिल को घटाने के प्रति संकल्पित है तथा इस क्षेत्र में निवेश को प्रेरित कर रही है, जिससे करियर निर्माण के अवसरों में लगातार इजाफा हो रहा है। |
| जबकि ईंधन और ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ती जा रही है, इस क्षेत्र में करियर बनाने का मतलब है पढ़ाई के बाद करियर के माध्यम से सोना बटोरना। |
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रोमांचक करियरइन दिनों पेट्रोलियम और ऊर्जा जीवन के लिए आवश्यक हो गई है। इनके बिना दैनिक कार्यकलाप संभव नहीं है। हमें अपने वाहनों में ईंधन के रूप में उद्योग तथा घर चलाने के लिए इनकी आवश्यकता होती है। जब स्थिति ऐसी है तो जो लोग इस क्षेत्र में करियर निर्माण की सोच रहे हैं, वे इससे सोना पैदा करेंगे। जब से निजी कंपनियों ने पेट्रोलियम उद्योग में प्रवेश किया है, युवा पीढ़ी के लिए रोमांचक करियर की संभावना तेज हो गई है।भारत का पेट्रोलियम उद्योगभारत की बड़ी इंडस्ट्रीज में पेट्रोलियम उद्योग का क्रम सबसे ऊपर आता है। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) एक कामधेनु है और इसी तरह अन्य तेल कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में सोना बटोर रही हैं। तेल उद्योग को अपस्ट्रीम (अन्वेषण और उत्पादन कार्यकलाप) तथा डाउनस्ट्रीम (रिफाइनिंग मार्केटिंग और वितरण) क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है, जिनमें सभी स्तरों पर करियर निर्माण के शानदार अवसर उपलब्ध हैं।स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
कार्य की प्रकृतिअपस्ट्रीम क्षेत्र में जिस प्रकृति का कार्य किया जाता है, उसमें तेल की संभावना और तेल तथा गैस की मौजूदगी के लिए परीक्षण करना तथा हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए द्विआयामी और त्रिआयामी भूकम्पीय आँकड़े प्राप्त करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करना शामिल है। यह कार्य भूगर्भशास्त्रियों द्वारा परिष्कृत प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर संपन्न किया जाता है, जिसमें जियो फिजिसिस्ट और इंजीनियर महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।करियर विकल्पपेट्रोलियम और ऊर्जा उद्योगों में भूगर्भशास्त्रियों, जियो फिजिस्ट और पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए अपस्ट्रीम गतिविधियों में केमिकल, मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल तथा इंस्ट्रुमेंटेशन तथा प्रोडक्शन इंजीनियरों के लिए डाउनस्ट्रीम गतिविधियों में करियर विकल्प उपलब्ध है।इन इंजीनियरों की खासी माँग है और इन्हें पेट्रोलियम उत्पादन कंपनियों (तेल क्षेत्र में काम करने पर भरपूर वेतन मिलता है), कंसलटिंग इंजीनियरिंग कंपनियों, कुओं की खुदाई करने वाली तथा जाँच कंपनियों के साथ-साथ ओएनजीसी इंडियन ऑइल, ऑइल इंडिया, भारत पेट्रोलियम, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम तथा रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स के अलावा रिसर्च और शैक्षणिक संस्थानों में आकर्षक वेतनमान पर रोजगार प्रदान किया जाता है। पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिए जाने के साथ ही इस उद्योग में नियुक्त कई पर्यावरण इंजीनियरों की भूजल तथा वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं को निपटाने में आवश्यकता होगी। इसके साथ ही पेट्रोकेमिकल जैसे सहयोगी उद्योगों में भी इंजीनियरों के लिए करियर निर्माण के अनुपम अवसर निर्मित होते जा रहे हैं।पारिश्रमिकचूँकि पेट्रोलियम उद्योग पूँजीगत उद्योग है, इसलिए इस क्षेत्र में पैसों की कोई कमी नहीं है। समुद्र के अंदर तेल कूपों पर कार्यरत पेट्रोलियम इंजीनियर छः लाख से लेकर बारह लाख रुपए प्रति वर्ष कमाते हैं। जो लोग अनुसंधान और अन्वेषण में संलग्न हैं, उन्हें आकर्षक वेतन के साथ आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा जैसे लाभ प्रदान किए जाते हैं।स्त्रोत : नईदुनिया अवसर