‘बम बम बोले’ ईरानी फिल्म ‘चिल्ड्रन ऑफ हेवन’ का भारतीय संस्करण है, जिसे प्रियदर्शन ने निर्देशित किया है। मजीद मजीदी की इस ईरानी फिल्म को कई पुरस्कार मिले हैं। दर्शील सफारी ‘तारे जमीं पर’ के बाद ‘बम बम बोले’ में नजर आएँगे।
खोगीराम (अतुल कुलकर्णी) अपनी पत्नी (रितुपर्णा सेनगुप्ता), बच्चे पिनू (दर्शील सफारी) और रिमझिम (जिया) के साथ ऐसे इलाके में रहता है जहाँ आतंकवादियों का दबदबा है। खोगीराम की आर्थिक हालत बहुत खराब है। किसी तरह उनके घर का खर्चा चलता है। इसका असर उसके बच्चों पर भी पड़ता है।
खोगीराम के बच्चे अच्छे स्कूल में जाते हैं क्योंकि खोगीराम नहीं चाहता कि उसके बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित रहे। हालाँकि उस स्कूल के स्टैंडर्ड से तालमेल बिठाना खोगीराम के लिए मुश्किल रहता है। स्कूल यूनिफॉर्म और जूतों के लिए उसके पास पैसे नहीं रहते। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब पिनू सब्जी की एक दुकान में रिमझिम के जूते गुमा देता है।
रिमझिम बिना जूतों के स्कूल कैसे जाए? आखिर में दोनों भाई-बहन फैसला करते हैं कि वे एक जोड़ी जूतों से ही वे काम चलाएँगे। पहले रिमझिम जूते पहनकर स्कूल जाती है और फिर पिनू।
इसी बीच पिनू को पता चलता है कि इंटरस्कूल मैराथन होने वाली है जिसमें एक इनाम एक जोड़ी जूते भी हैं। पिनू इसमें हिस्सा लेने का निर्णय लेता है ताकि वह रिमझिम के लिए जूते जीत सके।
क्या पिनू अपनी छोटी बहन के लिए यह कर पाएगा? क्या भगवान पिनू की मदद करेंगे ताकि उसकी मुसीबत दूर हो? क्या खोगीराम के परिवार के दिन फिरेंगे?
इनके जवाब मिलेंगे ‘बम बम बोले’ में।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें