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ईरानी सिंगर को बिना हिजाब कॉन्सर्ट करना पड़ा भारी, मिली 74 कोड़ों की सजा
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क्या है पूरा मामला?
मामला साल 2024 के दिसंबर महीने का है, जब परस्तू अहमदी ने ईरान के ऐतिहासिक 'देर-ए गचीन कारवांसेराई' में एक वर्चुअल कॉन्सर्ट का आयोजन किया था। इस प्रदर्शन को उन्होंने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइवस्ट्रीम किया था, जो देखते ही देखते वायरल हो गया और इसे लाखों व्यूज मिले।
इस लाइवस्ट्रीम के दौरान परस्तू ने बिना हिजाब के काले रंग की पोशाक में चार पुरुष संगीतकारों के साथ ईरान का बेहद लोकप्रिय देशभक्ति और विद्रोही गीत 'अज़ खूने जवाने वतन' गाया था। यह वही गीत है जो 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के 'महिला, जीवन, आजादी' आंदोलन का मुख्य प्रतीक बन गया था।
वीडियो जारी होने के तुरंत बाद परस्तू और उनके साथी कलाकारों को सुरक्षा एजेंसी ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद कोर्ट में मुकदमा चलाया गया। अब ईरान के कौम प्रांत की आपराधिक अदालत ने इस कॉन्सर्ट को 'अश्लील और अनैतिक' करार देते हुए पूरी टीम को दोषी माना है।
कोड़ों की सजा के साथ-साथ सभी नौ लोगों पर दो साल का देश छोड़ने का प्रतिबंध और दो साल तक किसी भी तरह की आर्टिस्टिक एक्टिविटीज में भाग लेने पर रोक लगा दी गई है।
यह पहली बार नहीं है जब ईरान में किसी महिला को हिजाब न पहनने या अपनी आवाज उठाने के लिए कोड़ों की सजा दी गई हो। इससे पहले जनवरी 2024 में रोया हेशमती नामक महिला को भी बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से घूमने के आरोप में 74 कोड़े मारे गए थे।
