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Last Updated : गुरुवार, 19 मार्च 2026 (18:04 IST)

एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सांप के जहर केस में FIR रद्द

Elvish Yadav Supreme Court relief
मशहूर यूट्यूबर और 'बिग बॉस OTT 2' के विजेता एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सांपों के जहर के इस्तेमाल के मामले में एल्विश के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है।
 
एल्विश के खिलाफ नोएडा में एक रेव पार्टी में सांप के जहर के इस्तेमाल के मामले में नवंबर 2023 में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। 
 
कोर्ट ने दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 55 के तहत शिकायत दर्ज करने का अधिकार केवल एक अधिकृत अधिकारी के पास होता है। इस मामले में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण थी।
 
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बरामद किया गया तरल पदार्थ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट की अनुसूची में प्रतिबंधित पदार्थ के तौर पर शामिल नहीं था। इसलिए, नशीले पदार्थों से जुड़ी धाराएं लागू नहीं की जा सकतीं।
 
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद नवंबर 2023 में शुरू हुआ था, जब उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक 'रेव पार्टी' में सांपों के जहर के कथित इस्तेमाल के आरोप में एल्विश यादव समेत कई लोगों पर केस दर्ज किया गया था। एल्विश को 17 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। चार्जशीट में आरोप था कि पार्टियों में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी में सांप के जहर का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता था।
 
एल्विश यादव के वकील सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने तर्क दिया कि एल्विश केवल एक मेहमान के तौर पर वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पुलिस को एल्विश के पास से कोई सांप या प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ। मेडिकल रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पकड़े गए सांप जहरीले नहीं थे।
 
भले ही तकनीकी आधार पर एल्विश को राहत मिल गई हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में सुनवाई के दौरान उनके आचरण पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि कोई भी व्यक्ति जानवरों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी से बचना कानून का उल्लंघन है।