सबसे सुंदर... मधुबाला

सितारों की भीड़ में खिला चाँद

तेरी जुल्फें, तेरी आँखें, तेरे अब्रू, तेरे लब
अब भी मशहूर हैं, दुनिया में मिसालों की तरह।

बरसों पहले, जैसे शायर ने ये पंक्तियाँ मधुबाला के लिए ही लिखी थीं।

मधुबाला यानी एक ऐसी कोमल कस्तूरी हिरणी, जिसके नटखट नेत्रों की एक भाषा है। लरजते लबों की एक भाषा है। वह समुद्र नहीं है किंतु समुद्र की तरह एक आकुल उद्दाम लहर जरूर है जिसमें क्षण भर के लिए शीर्ष पर जाकर ठहराव आ जाता है। समुद्र की वह लहर नीचे उतरने पर भी मन को एक आकर्षण में बाँध लेती है।
मधुबाला मन में हमेशा के लिए बस जाने वाले उसी आकर्षण का नाम हैं। वे चाँद का टुकड़ा या चाँद जैसी नहीं थीं, वे उज्ज्वल चमकीला पूर्णिमा का संपूर्ण चाँद ही थीं। उस दौर का चाँद, जब फिल्माकाश में दमकते नक्षत्रों की कोई कमी नहीं थी। एक से एक अदाकारा अपने सौंदर्य, रूप-रंग और अभिनय के जलवे बिखेर रही थीं।

नूरजहाँ जैसी खूबसूरत और दिलकश आवाज की मल्लिका पाकिस्तानी जाने की तैयारी कर चुकी थीं। सुरैया पहली ग्लैमर गर्ल होने के साथ दर्शकों का बेहिसाब प्यार बटोर रही थीं। मधुबाला सजी-धजी, नाजोअंदाज वाली, ठसकदार अभिनेत्रियों के बीच एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में उभरीं जिनके पारदर्शी सौंदर्य को किसी मेकअप, किसी अदा की जरूरत नहीं थी। वे सहज भाव से जो करतीं, वही अदा हो जाती थी। मधुबाला की एक और खासियत उन्हें समकालीन अभिनेत्रियों से जुदा करती है।
वह है, उनकी खनकती खुली खिलखिलाहट। एक बिंदास और बेबाक हँसी। जो भारत के खेत-खलिहान में किसी भी अल्हड़ किशोरी के सिवा अन्य के पास नहीं मिल सकती। नूतन, नरगिस के पास यदि उस हँसी का एक अंश था भी तो सौंदर्य में वे मधुबाला से पिछड़ गईं। मीना कुमारी ट्रेजडी क्वीन की छवि में बँधती जा रही थीं। मधुबाला और मीना कुमारी के जीवन और अभिनय का तुलनात्मक अध्ययन उनके बचपन से मृत्यु तक आसानी से किया जा सकता है। दोनों ने अपने करियर की शुरुआत बेबी मुमताज के रूप में की और दोनों ही सच्चे प्यार के लिए तरसती रहीं। मधुबाला को अंतिम दिनों में किशोर कुमार से वह मिला लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। निम्मी, गीताबाली और नलिनी जयवंत से मधुबाला की प्रतिस्पर्धी नहीं रही क्यों‍कि दर्शक उन्हें एक अलग छवि में पसंद कर चुके थे। यह वह दौर था जब नंबर वन की चुहिया दौड़ आरंभ नहीं हुई थी। यही वजह है कि मधुबाला के होते हुए भी उनकी समकालनी अभिनेत्रियों को कमतर नहीं आँका जा सकता।

नरगिस की शोखी, गीता बाली का अल्हड़पन, नूतन की नमकीनियत, मीना कुमारी की नजाकत, सुरैया की नफासत, साधना की मासूमियत, वहीदा की सादगी और वैजयंतीमाला की थिरकन-सबका अपना अस्तित्व था।

दर्शकों का अपना विस्तार था। इन जगमगाती तारिकाओं के बीच भी मधुबाला यदि वीनस की उपाधि से सम्मानित होती हैं तो मानना होगा कि मधुबाला के मादक मोहक सौंदर्य ने भारतीय दर्शकों की मीठी नींद चुराकर उन्हें मधुर सपनों की सौगातें दी हैं। सिर्फ आकर्षक देहयष्टि ही मधुबाला को शीर्ष पर ले गई यह सोचना उस अन‍ुपम सुंदरी और अनूठी अदाकारा के साथ अन्याय होगा। वे नख-शिख सुंदर होने के साथ सहजता, सादगी और सलोनेपन की सर्वोत्तम मिसाल थीं।

तू दूर है हमसे और पास भी है
तेरी कमी का कहीं अहसास भी है
लोग लाखों हैं जहाँ में खूबसूरत
पर तू प्यारा भी है और खास भी है।


हाफिज खुदा तुम्हारा...

इश्क का नूर नूर है, हुस्न की चाँदनी न देख
तू खुद तो आफताब है, जर्रे में रोशनी न देख।
जर्रों में रोशनी देखने की कोशिश ने मधुबाला की चमक को बार-बार प्रभावित किया। प्रेमनाथ, रहमान, कमाल अमरोही और से लेकर पति किशोर कुमार तक उनका प्यार छल-कपट का शिकार होता रहा। यही वजह है कि बचपन की दिल की बीमारी और आघातों को सहन करते हुए वे बढ़ती रहीं। मधुबाला का पहली बार दिल धड़का अभिनेता प्रेमनाथ के लिए।
प्रेमनाथ से उन्होंने टूटकर प्यार किया। इस कदर प्यार था उनमें कि निर्माता-निर्देशक प्रेमनाथ को नायक के रूप में लेना चाहते थे, तो मधुबाला से सिफारिश करते और मधुबाला प्रेमनाथ की तरफ से वचन भी दे देती थीं। इस प्रेम को ग्रहण लगा दिलीप कुमार के बीच में आने से। दिलीप कुमार प्रेमनाथ के परम मित्र थे। जब दिलीप मधुबाला की ओर आकर्षित होने लगे, तब प्रेमनाथ ने दोनों के बीच से हट जाने की ठानी। यहाँ तक कि उन्होंने उस वक्त की मशहूर अभिनेत्र बीना रॉय से शादी कर ली। इस शादी से मधुबाला को गहरा सदमा पहुँचा।

उन्होंने मंडप में जलती आँखों और सुलगते बदन से प्रेमनाथ से कहा था, 'मेरे प्यार की उपेक्षा कर तुम प्रेम विवाह कर रहे हो, याद रखना इस विवाह से तुम कभी सुखी नहीं हो सकोगे।'

हुआ भी ऐसा ही। प्रेमनाथ-बीना में कभी पटरी नहीं बैठी। प्रेमनाथ अक्सर कहते कि यह मधुबाला का सच्चा शाप है, इसलिए मेरा वैवाहिक जीवन नर्क हो गया है।
प्रेमनाथ जब मधुबाला के वियोग में बहुत शराब पीने लगे तब एक दिन मधुबाला धड़धड़ाती हुई पहुँची और कहा, 'प्रेम, आज के बाद यदि तुमने शराब पी तो मेरा खून पियोगे।'

प्रेमनाथ ने चौदह वर्ष तक शराब को हाथ नहीं लगाया। दुखी मधुबाला के जीवन में आए दिलीपकुमार।
दिलीपकुमार मधुबाला को लेकर कभी उतने भावुक नहीं हुए। उनके लिए व्यवसाय और प्यार दो अलग चीजें थीं। मधुबाला उन्हें‍ शिद्‍दत से चाहने लगी थीं। पिता अताउल्लाह खान की नजर दिलीप को खूब पहचानती थी। वे नहीं चाहते थे कि उनकी फूल-सी बिटिया दिलीप के परिवार वालों की नौकरानी बनकर रह जाए।
लिहाजा उनका इस संबंध में पुरजोर विरोध रहा। फिल्म 'नया दौर' की शूटिंग के लिए मधुबाला और दिलीप को भोपाल जाना था। अताउल्लाह खान ने मना कर दिया। फलस्वरूप 'नया दौर' से मधुबाला को निकाल दिया गया और वैजयंती माला का चयन हुआ।

'नया दौर' के संबंध में चले मुकदमे में कोर्ट में दिलीप ने स्वीकार किया कि 'वह मधुबाला से प्रेम करता है और जब तक जिंदा है, करता रहेगा।' लेकिन बकौल प्रेमनाथ, 'यह सिर्फ एक डायलॉग से ज्यादा कुछ नहीं है। असल में दिलीप ने अपने स्वार्थ के लिए मधुबाला का इस्तेमाल किया और बाद में ऐसे ही झटका जैसे कोई शरीर पर चढ़े कॉकरोच को झटकता है। मेरी दोस्ती के लिए किया गया त्याग व्यर्थ गया। मैं उस वक्त भावुक नहीं होता तो आज मधुबाला मेरी पत्नी के रूप में जानी जाती।'

दिलीप से धोखा खाई मधुबाला इस कदर बिखरी कि उन्हें दिल की बीमारी ने घेर लिया। अपनी इस बीमारी से अवगत होते ही मधुबाला ने अपनी एक रिश्तेदार से कहा था - 'भाभी, मैं शादीशुदा मरना चाहती हूँ।'

डॉक्टरों का कहना था कि उसे अपने दिल पर कोई बोझ नहीं रखना चाहिए और जितना हो सके खुश रहना चाहिए। जालिम जमाना उन्हें खुश होने नहीं दे रहा था।
फिल्म मुगल-ए-आजम में अकबर का संवाद है - 'अनारकली, सलीम तुझे मरने नहीं देगा और हम तुझे जीने नहीं देंगे।' उसी सलीम ने उन्हें ऐसी सौगातें दी कि वे मौत की तरफ बढ़ने लगीं।

ऐसी विकट परिस्थिति में उन्हें शरारती, मस्तीखोर किशोर कुमार मिले। किशोर उन दिनों रूमादेवी से तलाके के कारण अवसादग्रस्त थे। मधुबाला ने किशोर कुमार को अपने विषय में बताया और शादी के लिए पूछा। किशोर कुमार जानते थे कि वे मधुबाला उन्हें पत्नी का सुख नहीं दे सकती। नि:स्वार्थ आत्मिक प्यार के रूप में उन्होंने मधुबाला से विवाह रचाया। आमतौर पर किशोर को लोग प्रोफेशनल पर्सन के रूप में जानते हैं। किशोर ने अपनी खूबसूरत पत्नी के इलाज और सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें डॉक्टर को प्रतिदिन दस हजार रुपए देने पड़ते थे। मधुबाला धीरे-धीरे मौत की तरफ जा रही थीं। वे फोन कर अपने परिचितों को बुलातीं।
एक बार जब शक्ति सामंत उनसे मिलने पहुँचे तो मधुबाला मेकअप में बैठी थीं। शक्ति ने पूछा - 'तुम्हें मेकअप की क्या जरूरत थी।' मधुबाला ने लरजते स्वर में कहा - शक्ति, आपने मुझे अपने जीवन के सबसे खूबसूरत रूप में देखा है। क्या आप देख सकते हैं कि अब मैं कैसी लगने लगी हूँ।'

शक्ति सामंत की आँखें बरसने लगीं और वे उठकर बाहर चले आए। सौंदर्य की देवी को निराशा, कुंठा और अवसाद ने इस कदर घेर लिया था कि किशोर का प्यार भी उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सका। शक्ति सामंत की आर्थिक स्थिति जब कमजोर थी तब मधुबाला ने उनकी फिल्म 'हावड़ा ब्रिज' के लिए कोई पैसा नहीं लिया था। ऐसी सहृदया सहज अभिनेत्री को अपने अंतिम जन्मदिन पर सिर्फ एक गुलदस्ता मिला।

मधुबाला के जीवन में सिर्फ प्रेमनाथ, दिलीप और किशोर ही नहीं बल्कि रहमान और कमाल अमरोही के आने के भी किस्से मिलते हैं। कमाल ने अपना प्रणय निवेदन तब किया जब दिलीप-मधु का प्रेम प्रकरण शीर्ष पर था। मधु के इंकार करने पर कमाल ने उसे धमकी दी थी कि एक दिन तुमसे बड़ी अभिनेत्री से शादी करके दिखाऊँगा। कमाल की मीना कुमारी से शादी सफल नहीं रही, क्योंकि यह उस चैलेंज का परिणाम थी। रहमान ने सुरैया से टूटने के बाद मधुबाला से जुड़ने की कोशिश की थी पर असफल रहे।

नृत्य सम्राट गोपीकृष्ण जैसे कट्‍टर ब्राह्मण भी मधुबाला के हुस्न की चपेट में आए बगैर नहीं रहे। हालाँकि वह प्रेम संबंध नहीं था। दरअसल फिल्म 'साकी' के सेट पर वे मधुबाला को डांस स्टेप्स सिखा रहे थे। ब्रेक में मधुबाला ने उन्हें नाश्ते का ऑफर किया तो वे अभिभूत-से गोपीकृष्ण चिकन/मटन टोस्ट जैसे नॉनवेज उदरस्थ कर गए। जब सेट पर उपस्थित लोगों ने मधुबाला से पूछा - 'इन्हें क्या खिला दिया?' मधु ने मासूमियत से कहा - 'जो मैंने खाया वही मैंने खिलाया।'
जब नॉनवेज का पता चला तो गोपीकृष्ण बेचैन हो गए। मधुबाला रो पड़ीं - 'मैंने जानबूझकर नहीं किया है।' मधुबाला वक्त की पाबंद तो थीं हीँ, स्वाभिमानी भी बहुत थीं। एक बार छायाकार धरम चोपड़ा मधुबाला के 12 फोटो खींचकर उन्हें भेंट देने के लिए लाए। मधुबाला ने मुफ्त में लेने से इंकार कर दिया। कीमत पूछी, धरम ने मजाक में कहा - 'देना ही है तो हर फोटो के सौ रुपए देने होंगे।' मजाक अभी पूरा भी नहीं हुआ था ‍कि मधुबाला ने तत्काल 1200 रुपए धरम चोपड़ा को थमा दिए।
मृत्यु से पूर्व मधुबाला ने अपनी बहन से कहा था ‍कि जब जरा काम की समझ आई तो ऊपर वाले ने कहा - बस! मधुबाला के दिल पर विमानों की आवाज ने दबाव बनाया तब वह अपने पिता के घर आ गईं।

यही भोर का तारा 'वीनस' अपनी संपूर्ण चमक के साथ अस्त हो गया। 23 फरवरी 1969 को मधुबाला छोड़ गईं इस बेदर्द, बेरहम जमाने को और छोड़ गईं वे ढेर सारी महकती, मचलती यादें। फिजाओं में गूँजता रहा गाना - हाफिज खुदा तुम्हारा...।
कहीं आँखें, कहीं चेहरा, कहीं लब
हमेशा एक मिलता है, कई में
चमकती है अँधेरों में खामोशी
सितारे टूटते हैं, रात ही में।



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