Exclusive Interview : हर दिन सोचता था कि ऐसा क्या करूं की सलमान मुझसे कमतर दिखे : किच्चा सुदीप

रूना आशीष| Last Updated: बुधवार, 11 दिसंबर 2019 (20:14 IST)
किसी के लिए बहुत आसान होता है कि वो हीरो के सामने छोटा या दब्बू दिखे खास तौर पर अगर वो फिल्म में विलेन का काम कर रहा हो तो। लेकिन मेरे लिए बात अलग थी, फिल्म दबंग में खलनायक लार्जर देन लाइफ हो या कुछ भी बना हो मेरे लिए इस बात के मायने नहीं थे। मुझ पर जिम्मेदारी थी कि मैं एक ऐसा विलेन लगूं जो सलमान पर हावी हो सके। मुझे हर पल ये याद रखना होता था कि लोग चुलबुल पांडे को शायद देखने ना आएं वो सलमान को देखने आए हैं। क्योंकि सलमान जब पर्दे पर आते हैं तो अपना एक ऑरा ले कर आते हैं।

दक्षिण की फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले के लिए हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री भले ही नई ना हो लेकिन सलमान ख़ान की दबंग दास्तां नई है। फिल्म के बारे में बात करते हुए सुदीप ने वेबदुनिया को बताया कि, 'मेरा जो रोल के अपोजिट लिखा गया वो इसी बात को ध्यान में रखते हुए लिखा गया कि मैं उनके सामने बहुत मजबूती के साथ रहूं या मैं बहुत दमदार शख्सियत रहूं।

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क्योंकि जब मेरे सामने फिल्म के अंत में सलमान अपने जुनून के चलते मुझसे टकराएंगे तो लोगों को मजा आएगा। वरना फिल्म में अच्छा बनना या अच्छे इंसान को दर्शना आसान हो जाता। बुरा जो बनता है उसे कुछ ज्यादा ही बुरा बनना पड़ता है ताकि लोग उसे इस रूप में स्वीकार कर लें। लेकिन मेरे लिेए इसमें अभी एक विरोधाभास आया। मैंने अभी तक जितने भी रोल निभाए हैं उसमें पॉजिटिव रोल ज्यादा रहे हैं।

कई बार जब मैं कोई सीन कर रहा हूं तो मैं ऐसे रिएक्ट कर जाता था जैसे कि मैं अच्छे शख्स का किरदार कर रहा हूं। तब जान बूझ कर अपने आप पर ये सोच डालना पड़ती थी कि ये नकारात्मक भूमिका है। मुझे हर रोज सोचना पड़ता था कि क्या करूं ऐसा कि सलमान मुझसे कमतर दिखे जो मेरे लिए मुश्किल काम था। सलमान का अपना एक तरीका है। मुझे रोज सुबह उठ कर सोचना पड़ता था। मुझे रोज सलमान से डील करना पड़ी है ताकि काम अच्छा कर सकूं।

तो आपने कैसे रास्ता निकाला?
बहुत मुश्किल था। चुलबुल के सामने खड़े रहना अपने आप में चुनौती थी। क्या करूं अभी तक हमेशा हीरो के रोल किए हैं तो जब भी चुलबुल कुछ कहता था तो मेरे अंदर से वो हीरोइज़्म आ जाता था और मैं कैसे ये बता दूं कि चुलबुल जैसे ऑफिसर को देख कर मैं डर गया। ऐसा अगर बता दिया तो आप फिल्म के अंत में क्या देखेंगे।

मैंने एक आसान रास्ता निकाला कि जो काम चुलबुल बने सलमान नहीं कर रहे वो मैं कर दूं। वो कहां जा कर बदमाशी की सीमा लांघने से रुक जाते हैं वो सीमा में लांघ जाता। जो वो फिल्म में हीरो होने के कारण नहीं कर रहे हैं उस काम को चुलबुल का दुश्मन होने के नाते मैं कर लेता। तो मैं और ज्यादा क्रूर लग सकूं। इससे ज्यादा समझने के लिए फिल्म देखनी होगी।
दबंग कैसे मिली?
सोहेल मेरे अच्छे दोस्त हैं। उन्होंने मेरे लिए सिर्फ नाम सामने लाने का काम नहीं किया उन्होंने तो जिद पकड़ ली थी। सलमान ने मुझसे वीडियो कॉल किया वो शायद तब न्यूयॉर्क में थे दबंग टूर के लिए। और मुझे अभिमानी ना मानें लेकिन प्रभुदेवा और सलमान को ये लग रहा था कि मैं उनके लिए दबंग ३ में विलेन का रोल स्वीकार करूंगा या नही। उन्होंने सोचा कि मैं अभी तक हीरो का रोल निभाते आया हूं या फिर मक्खी भी की तो उसमें मेरी पिटाई नहीं हुई। लेकिन दबंग में तो विलेन बहुत मार खाते हैं पता नहीं मैं मार खाना चाहूंगा या नहीं।

हिन्दी फिल्मों में काम करने का समय नहीं था या मौका कम मिला?
मैं तो हमेशा तैयार रहता हूं। लेकिन क्या करूं कोई काम भी तो बताए कि करना क्या है? जब मैंने इगा (मक्खी) की थी दो मुझे बहुत प्यार मिला था। जहां जाता था जब इगा वाम से बुलाते थे। जितना मैंने काम किया उतना उस फिल्म ने मुझे वापस भी किया। लेकिन जब ये फिल्म बन रही थी तो रामगोपाल वर्मा ने मुझे रशेस देख कर कह दिया था कि ये फिल्म तुम्हें हिट कर देगी। तुम बुलंदियों का छू लोगे लेकिन ये ही बात तुम्हारे परेशानी का सबब बन जाएगी।

फिल्म के बारे में जो कहा वो हुआ भी। कई निर्माता निर्देशक कहते थे कि वो मेरे साथ काम करना चाहते हैं। लेकिन क्या काम क्या रोल यह मालूम नहीं। रामू वे बताया था कि लोग काम करना चाहेंगे, लेकिन क्या रोल ऑफर करना है ये सोचने मैं तुम्हारे लिए 2 साल लग जाएंगे। वही हुआ भी, मैं तो काम करने के लिए तैयार हूं बता दो क्या करना है।
अब जरा सच-सच बताइए मक्खियों को देख कर क्या महसूस होता है?
(हंसते हुए), मुझे वो आज भी बहुत बुरी लगती हैं। मुझे नहीं लगता मक्खियां किसी को भी पसंद आती होंगी।


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