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दीपिका-कंगना-तापसी-आलिया-विद्या: हीरो से कहीं आगे हैं ये हीरोइन | women day special article on bollywood actress

Womens day special article on film
महिला और पुरुष के बीच समानता की चाहे कितनी बात हो, बॉलीवुड की हकीकत तो यह है कि यहां पर पुरुषों का ही राज चलता है। महिला निर्देशक गिनी-चुनी हैं। हीरो को मिलने वाली फीस, हीरोइन की तुलना में कई गुना ज्यादा है। हीरो की फिल्म को हीरोइन की फिल्म की तुलना में बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा बेहतर ओपनिंग मिलती है। यानी कि दर्शक भी नायिका प्रधान फिल्मों की तुलना में नायक प्रधान फिल्म को ज्यादा तवज्जो देते हैं इसलिए सिर्फ बॉलीवुड वाले ही नहीं, बल्कि दर्शक भी दोषी हैं। पिछले 10-15 वर्षों में बॉलीवुड की हीरोइनों की स्थिति में थोड़ा फर्क नजर आया है। हालांकि यह फर्क मामूली है, लेकिन इसे सकारात्मक बात मानी जा सकती है। संभव है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति और सुधरे। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी हीरोइनें भी सामने आई हैं जिन्होंने न केवल बेहतरीन फिल्में कीं बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी सफलता का परचम लहराया। ये काम उन्होंने अपने बूते पर किया। किसी पुरुष स्टार की बैसाखी का सहारा नहीं लिया। 

तापसी पन्नू 
तापसी पन्नू की फिल्मोग्राफी देख किसी को भी गर्व हो सकता है। गर्व, मुल्क, बदला, सूरमा, थप्पड़, हसीन दिलरूबा, रश्मि रॉकेट, सांड की आंख, लूप लपेटा जैसी फिल्में तापसी की बेहतरीन अदाकारी से सजी हैं। इनमें से कुछ फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा कारोबार किया है। हसीन दिलरूबा 2021 में नेटफ्लिक्स पर सबसे ज्यादा देखी गई हिंदी फिल्म थी। इन फिल्मों में तापसी के साथ कोई बड़ा स्टार या बिकाऊ स्टार नहीं है। तापसी को सशक्त रोल मिले और इसका उन्होंने पूरा फायदा उठाया। आज दमदार हीरोइन का कोई रोल हो तो निर्देशक के दिमाग में तापसी का नाम ही सबसे पहले आता है।

आलिया भट्ट 
आलिया भट्ट स्टार भी हैं और शानदार कलाकार भी। एक ओर वे घोर कमर्शियल फिल्में भी करती हैं तो दूसरी ओर ऑफ बीट फिल्म भी। राजी, गंगूबाई काठियावाड़ी, गली बॉय, डियर जिंदगी में आलिया के साथ सितारे भी थे, लेकिन आलिया का रोल भी कम नहीं था। फिल्में भी सफल रहीं। गंगूबाई काठियावाड़ी की सफलता ने आलिया का कद ऊंचा कर दिया है। वे अपने दम पर फिल्म चला सकती हैं, ये उन्होंने साबित किया। 

दीपिका पादुकोण 
दीपिका पादुकोण ने अपने करियर की शुरुआत में मसाला फिल्मों में महत्वहीन रोल भी निभाए, लेकिन एक बार स्थापित हो जाने के बाद वे बड़े बजट की फिल्मों में दमदार रोल निभाते नजर आईं। पीकू, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, छपाक और गहराइयां में दीपिका के रोल एक-दूसरे से बिलकुल अलग हैं। बाजीराव मस्तानी में वे जहां राजकुमारी की तरह लगीं तो छपाक में एसिड अटैक विक्टिम का रोल अदा किया। गहराइयां में उनका अलग अंदाज देखने को मिला। फीस के मामले में भी वे आगे निकली और उनके जितनी फीस कई बड़े नामी मेल स्टार्स को नहीं मिलती। 

कंगना रनौट 
बेबाक बयान देने वाली कंगना रनौट ने दिखा दिया कि अपनी शर्तों पर भी बॉलीवुड में सफलता पाई जा सकती है। नामी स्टार्स ने कंगना से सदैव दूरी बना कर रखी, लेकिन कंगना के पास काम की कमी नहीं रही। क्वीन, रिवॉल्वर रानी, तनु वेड्स मनु सीरिज, पंगा, थलाइवी, मणिकर्णिका, सिमरन जैसी फिल्मों में कंगना का अभिनय देखते ही बनता है। इनमें से कुछ फिल्में सफल तो कुछ असफल रहीं, लेकिन कंगना के अभिनय क्षमता पर किसी ने सवाल नहीं खड़े किए। 

विद्या बालन 
पिछले दस-बारह सालों की बात की जाए तो विद्या बालन ऐसी नायिका रहीं जिन्होंने नायिका प्रधान फिल्मों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इश्किया, नो वन किल्ड जेसिका, द डर्टी पिक्चर, कहानी जैसी फिल्मों की कामयाबी के बाद निर्माताओं में नायिका प्रधान फिल्मों को बनाने का विश्वास जागा। तीन, बेगम जान, तुम्हारी सुलू, शंकुतला देवी, शेरनी जैसी उम्दा फिल्में भी विद्या के खाते में दर्ज हैं। आज भी विद्या इसी तरह की फिल्मों में सक्रिय हैं। 
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें
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