बुधवार, 27 सितम्बर 2023
  1. सामयिक
  2. बीबीसी हिंदी
  3. बीबीसी समाचार
  4. Will the situation improve after Amit Shah reaches Manipur?
Written By BBC Hindi
पुनः संशोधित: बुधवार, 31 मई 2023 (07:47 IST)

अमित शाह के मणिपुर पहुंचने के बाद क्या सुधरेंगे हालात?

amit shah in manipur
दिलीप कुमार शर्मा, बीबीसी हिंदी के लिए, गुवाहाटी से
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार यानी 29 मई को हिंसा प्रभावित मणिपुर के तीन दिवसीय दौरे पर इम्फ़ाल पहुंचे। इस दौरान वे मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण पैदा हुई स्थिति का आकलन कर रहे हैं। वे राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कई बैठकें भी कर रहे हैं।
 
बीती तीन मई को मणिपुर में व्यापक स्तर पर जातीय हिंसा भड़कने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ये पहला मणिपुर दौरा है। लेकिन उनके दौरे से ठीक 24 घंटे पहले रविवार को मणिपुर के इम्फाल ईस्ट और वेस्ट ज़िले समेत कई अन्य इलाक़ों में व्यापक हिंसा हुई।
 
इस हिंसा में एक पुलिस अधिकारी समेत कम से कम पाँच लोग मारे गए हैं। जबकि 30 से अधिक घरों को जला दिया गया। बीजेपी के एक विधायक के घर में तोड़फोड़ हुई और उनकी दो गाड़ियों को जला दिया गया।
 
स्थानीय मीडिया में भीड़ की ओर से मणिपुर राइफ़ल्स और आईआरबी के शस्त्रागार से क़रीब एक हज़ार हथियार और गोला-बारूद लूटे जाने की भी रिपोर्ट आई है।
 
गृह मंत्री के दौरे से पहले क्यों हुई इतनी हिंसा
गृह मंत्री के दौरे से एक दिन पहले रविवार को इम्फाल पश्चिम के कांगचुप, खुरखुल, इम्फाल पूर्व के सगोलमंग तथा चुराचांदपुर के कई इलाक़ों में गोलीबारी हुई। इसके अलावा बिष्णुपुर ज़िले में कुम्बी विधानसभा क्षेत्र के कुछ गाँवों में लोगों के घर जला दिए गए।
 
ऐसा कहा जा रहा है कि 3 मई को राज्य में जिस स्तर पर हिंसा हुई थी, उसके दो दिन बाद घटनाएँ कम हो गई थीं।
लेकिन रविवार को एक बार फिर हिंसा देखने को मिली।
 
मणिपुर क्यों सुलग रहा है?
  • मणिपुर में जारी अशांति के केंद्र में मैतेई और कुकी समुदाय हैं।
  • राज्य की कुल आबादी 30-35 लाख है जिसमें मैतेई समुदाय बहुसंख्यक है।
  • मणिपुर के 10 प्रतिशत भूभाग पर मैतेई समुदाय का दबदबा।
  • 90 फ़ीसदी पहाड़ी इलाक़ों में कुकी और बाक़ी जनजातीय समुदाय।
  • मैतेई लंबे समय से जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
  • मणिपुर हाई कोर्ट ने मार्च में राज्य सरकार से मैतेई को जनजाति का दर्जा दिए जाने पर विचार करने को कहा।
  • हाई कोर्ट के ऑब्ज़र्वेशन के बाद मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हुई।
 
मणिपुर के मानवाधिकार कार्यकर्ता बबलू लोइतोंगबाम रविवार को हुई हिंसा पर कहते हैं, "गृह मंत्री मणिपुर आ रहे हैं इसलिए हिंसा फैलाने वाले समूहों को लगता है कि इस तरह से उनका ध्यान खींचा जा सकता है। उनको लगता है कि ऐसा हिंसक तरीक़ा अपनाने से केंद्र सरकार तत्काल कोई फ़ैसला करेगी।"
 
"इसके अलावा इस हिंसा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का जो तरीक़ा रहा है, उससे कुकी लोगों में शांति स्थापित करने का प्रयास नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री को किसी एक समुदाय का हीरो बनने की बजाए दोनों तरफ़ प्रयास करना होगा ताकि राज्य में शांति स्थापित की जा सके।"
 
बबलू लोइतोंगबाम राज्य में हिंसा कम करने के लिए मौजूदा नेतृत्व में तत्काल बदलाव को ज़रूरी बताते हैं।
 
वे कहते है, "अभी जिस तरह का माहौल बन गया है। इस टकराव में चरमपंथी उतर गए हैं। संघर्ष विराम का हिस्सा रहे कूकी चरमपंथी नेता तो इस हिंसा में शामिल होने की बात से इनकार कर रहे हैं, लेकिन वो लोग बहुत आक्रामक हो गए है। ऐसे में केंद्र सरकार की भूमिका बहुत अहम हो गई है।"
 
आरोप-प्रत्यारोप से विभाजन बढ़ा
इस ताज़ा हिंसा को लेकर मैतेई और कुकी जनजाति के लोग एक-दूसरे पर हर तरह से आरोप लगा रहे हैं।
 
भारतीय जनता युवा मोर्चा मणिपुर इकाई के महासचिव राजकुमार मिक्सन कहते हैं, "हमारी सरकार सेना और सुरक्षाबलों की मदद से राज्य में शांति स्थापित करने के हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन कुकी चरमपंथी निर्दोष लोगों पर हमला कर रहे हैं। ये चरमपंथी लगातार प्रदेश का माहौल ख़राब कर रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो इस समस्या का समाधान कैसे निकलेगा।"
 
कुकी जनजाति से आने वाली किम वाइपे (बदला हुआ नाम) का आरोप है कि मैतेई लोग उनकी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने के लिए लगातार हिंसा को अंजाम दे रहे हैं।
 
वे कहती हैं। "नेशनल मीडिया केवल वही ख़बर दिखाती है, जो मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार कह रही है। हमारे कुकी लोगों को चरमपंथी घोषित किया जा रहा है।"
 
कुकी लोगों की शीर्ष संस्था कुकी इंपी मणिपुर के प्रवक्ता थांगमिनलेन किपगेन को गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से बहुत उम्मीद है।
 
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मीडिया में जो बातें कही जा रही हैं, उनसे परे यहाँ ज़मीन पर साफ़ दिखता है कि मणिपुर की सरकार स्थिति को संभालने में पूरी तरह विफल रही है। अगर हम आपसी आरोपों को छोड़ दें, तो भी सुरक्षाबलों की तैनाती के बीच घर जलाए जा रहे हैं और लोगों को मारा जा रहा है।"
 
उन्होंने कहा कि यहाँ अब ऐसी स्थिति हो गई है कि चुने हुए प्रतिनिधि विधानसभा तक जाने में कतरा रहे हैं क्योंकि उनकी जान को ख़तरा है।
 
किपगेन कहते हैं, "हमारा एक विधायक आज भी दिल्ली के एक अस्पताल में कोमा में है। कुकी जनजाति के आईपीएस अधिकारी अपने परिवार और रिश्तेदारों को सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। सरकारी अधिकारी इम्फाल में काम पर नहीं लौट सकते। इम्फाल में पढ़ने वाले छात्र वहाँ वापस नहीं जा पा रहे हैं।"
 
उन्होंने दावा किया कि इस समय कुकी लोगों के लिए इम्फाल जाना किसी भी तरह संभव नहीं है।
 
किपगेन कहते हैं- हमारे लोग बहुत डरे हुए हैं। लिहाज़ा ऐसी स्थिति में एकमात्र समाधान है कि हमारे पहाड़ी ज़िलों के लिए अलग से प्रशासनिक व्यवस्था की जाए।
 
केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाक़ात के बारे मे किपगेन कहते हैं, "हमें बताया गया है कि गृह मंत्री अमित शाह चुराचांदपुर और हिंसा प्रभावित पहाड़ी ज़िले में आकर हमारे लोगों से मिलेंगे। हम उनसे मिलकर इन सारी बातों से उन्हें अवगत कराना चाहते हैं। हमारे 10 कुकी विधायक उनके समक्ष पहाड़ी इलाक़ों के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था की बात पहले ही रख चुके हैं। हमें मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और उनकी सुरक्षा एजेंसियों पर अब बिल्कुल भरोसा नहीं है। हम अमित शाह से गुज़ारिश करेंगे कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाकर कुकी लोगों के लिए अलग प्रशासन की व्यवस्था करें।"
 
amit shah in manipur
गृह मंत्री के दौरे में देरी पर सवाल?
मैतेई समुदाय और कुकी जनजाति के बीच 3 मई से शुरू हुई इस हिंसा में 75 से अधिक लोगों की जान गई है। हिंसा के कारण 35 हज़ार से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।
 
मणिपुर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष के देवव्रत सिंह हिंसा के 25 दिन बाद राज्य के दौरे पर आए अमित शाह की मंशा पर सवाल उठाते है।
 
वे कहते हैं, "3 मई से प्रदेश में हिंसा हो रही है। लोग मर रहे हैं। लेकिन गृह मंत्री अब आ रहे हैं। अगर वो हिंसा शुरू होने के एक-दो दिन के भीतर यहाँ आ जाते तो इतने लोगों की जान नहीं जाती। उनको पहले आकर यहाँ की स्थिति संभालनी चाहिए थी।"
 
वे कहते हैं, "असम में हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार के दो साल पूरे होने के कार्यक्रम में अमित शाह आ सकते हैं लेकिन मणिपुर जल रहा है और उन्हें यहाँ आने की फुर्सत नहीं है। अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मणिपुर की स्थिति पर कोई बात नहीं की है।"
 
मानवाधिकार कार्यकर्ता बबलू लोइतोंगबाम का भी यही मानना है कि अगर गृह मंत्री राज्य का पहले दौरा कर लोगों से बात कर लेते, तो स्थिति इतनी जटिल नहीं होती।
 
इस बीच मानवाधिकार हनन को रोकने के लिए काम करने वाली संस्था द राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) ने केंद्रीय गृह मंत्री से जातीय हिंसा को नियंत्रण में लाने के लिए मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार करने का आग्रह किया है।
 
आरआरएजी के निदेशक सुहास चकमा ने कहा, "जातीय हिंसा की लपटों को बुझाने के लिए सैन्य अभियान पर्याप्त नहीं हैं। विश्वास और शांति स्थापित करने के लिए सभी स्तरों पर अंतर-सामुदायिक संवाद की आवश्यकता है, लेकिन राज्य सरकार पिछले एक महीने में ऐसा कोई भी अंतर-सामुदायिक संवाद शुरू नहीं कर पाई है।"
 
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि वहाँ इस तरह की प्रक्रिया शुरू करने की स्वीकार्यता नहीं है। इस कारण यहाँ राष्ट्रपति शासन को लागू करना आवश्यक बन जाता है। क्योंकि केंद्र सरकार को एकमात्र तटस्थ और स्वीकार्य देखा जा रहा है।"
 
यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट और कुकी नेशनल ऑर्गेनाइज़ेशन नामक कुकी चरमपंथियों के दो बड़े संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संघर्ष ग्रस्त मणिपुर राज्य के दौरे को एक सकारात्मक पहल बताया है।
 
बीजेपी का जवाब
मणिपुर प्रदेश बीजेपी की अध्यक्ष शारदा देवी कहती हैं कि उनकी सरकार लगातार राज्य में शांति बहाल करने की कोशिश कर रही है।
 
उन्होंने कहा है- केंद्र सरकार शुरू से हमारी मदद कर रही है ताकि राज्य में माहौल सामान्य हो सके। अभी हमारे गृह मंत्री अमित शाह जी आए हैं और जल्द ही हम इस समस्या का समाधान निकालेंगे। इस समय हमारी प्राथमिकता मणिपुर में शांति बहाल करना है। इसके लिए हमारी सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है। यहाँ शांति स्थापित करना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।
 
25 मई को असम के दौरे पर आए गृह मंत्री शाह ने कहा था कि बीजेपी सरकार हर व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
चित्र सौजन्य : अमित शाह ट्विटर अकाउंट
ये भी पढ़ें
बढ़ता तापमान खतरे की घंटी, डूब जाएंगे शहर, महामारियों का भी डर