हिन्दी प्रेम कविता : वह घूम रही उपवन-उपवन... वह घूम रही उपवन-उपवन पुष्पों-सी नजाकत अधरों पर, नवनीत-सा कोमल उर थामे। एक पाती प्रेम भरी लेकर वह घूम रही ...