‘कृष्ण बलदेव वैद’ का ‘अविनाश’ को कभी न लिखा गया एक ‘ख़त’ मैं कभी ऐसा लेखक नहीं रहा जिसे तुम सीने से लगाओ। अगर तुम हिंदीवाले हो तो तुम्हें सीने से प्रेमचंद, रेणु और मुक्तिबोध को ...