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कैंची की तरह शुभ फल काट देते हैं पापकर्तरी योग

पापकर्तरी योग
ज्योतिष शास्त्र में पापकर्तरी योग को बहुत ही हानिकारक माना गया है। पापकर्तरी योग जिस जातक की जन्मपत्रिका में होता है उसे संघर्षमय व कष्टप्रद जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। आइए जानते हैं कि जन्मपत्रिका में किन ग्रहस्थितियों में पापकर्तरी योग का सृजन होता है। 
 
कर्तरी संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है काटना। जन्मपत्रिका में जब किसी भाव के दोनों ओर पाप ग्रह स्थित हों तो वे कैंची के समान उस भाव के फल को काट देते हैं अर्थात् उस भाव का शुभ फल नष्ट कर देते हैं। इसे ही ज्योतिष की भाषा में पापकर्तरी योग कहा जाता है। जब यह स्थिति शुभ भाव के दोनों ओर बनती है तो इसे विशेष अशुभ समझा जाता है।

 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
सम्पर्क: [email protected]
लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें
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