लरज़ती हैं खिड़कियाँ
धमक कहीं हो, लरज़ती हैं खिड़कियाँ मेरी
घटा कहीं हो, बदलता है सायबाँ मेरा ------ नश्तर ख़ानक़ाही
लरज़ती हैं---------हिलती हैं
सायबाँ ----------आँगन की छत
घटा कहीं हो, बदलता है सायबाँ मेरा ------ नश्तर ख़ानक़ाही
लरज़ती हैं---------हिलती हैं
सायबाँ ----------आँगन की छत
- वेबदुनिया पर पढ़ें :
- समाचार
- बॉलीवुड
- ज्योतिष
- लाइफ स्टाइल
- धर्म-संसार
- महाभारत के किस्से
- रामायण की कहानियां
- रोचक और रोमांचक
