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लरज़ती हैं खिड़कियाँ

लरज़ती हैं खिड़कियाँ
धमक कहीं हो, लरज़ती हैं खिड़कियाँ मेरी
घटा कहीं हो, बदलता है सायबाँ मेरा ------ नश्तर ख़ानक़ाही

लरज़ती हैं---------हिलती हैं
सायबाँ ----------आँगन की छत
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WD