मैं पंछी हूँ मुहब्बत का
मैं पंछी हूँ मुहब्बत का, फ़क़त रिश्तों का प्यासा हूँ,
ना सागर ही मुझे समझे ना ही सहरा समझता है - अंकित सफ़र
ना सागर ही मुझे समझे ना ही सहरा समझता है - अंकित सफ़र
