तेनालीराम की कहानियां : बहुरुपिए हैं या राजगुरु

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राजगुरु ने एकदम अपना असली रूप प्रकट कर दिया और से क्षमा मांगने लगे। तेनालीराम ने हंसते हुए उसे क्षमा कर दिया और उपचार के लिए वैद्यों को सौंप दिया। कुछ ही दिनों में राजगुरु स्वस्थ हो गया।


उसने तेनालीराम से कहा, ‘आज के बाद मैं कभी तुम्हारे लिए मन में शत्रुता नहीं लाऊंगा। तुम्हारी उदारता ने मुझे जीत लिया है। आज से हमें दोनों अच्छे मित्र की तरह रहेंगे।’

तेनालीराम ने राजगुरु को गले लगा लिया। उसके बाद तेनालीराम और राजगुरु में कभी मनमुटाव नहीं हुआ



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