सिंहासन बत्तीसी : सोलहवीं पुतली सत्यवती की कहानी

FILE

ब्राह्मण असमंजस में पड़ गया और बोला कि अपने परिवार के हर सदस्य से विमर्श करने के बाद ही कोई फैसला करेगा।

जब वह घर पहुंचा और अपनी पत्नी, बेटे तथा बेटी को सारी बात बताई, तो तीनों ने तीन अलग तरह के रत्नों में अपनी रुचि जताई। ब्राह्मण फिर भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका और इसी मानसिक दशा में राजा के पास पहुंच गया।

विक्रम ने हंसकर उसे चारों के चारों रत्न उपहार में दिए


WD|



और भी पढ़ें :