सिंहासन बत्तीसी : सत्‍ताइसवीं पुतली मलयवती की कहानी

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जब कई घण्टों बाद वे होश में आए तो उन्होंने पाया कि उनका सर भगवान विष्णु की गोद में है। उन्हें भगवान विष्णु को देखकर पता चल गया कि तपस्या से रोकने वाला तपस्वी और कोई नहीं स्वयं भगवान विष्णु थे।

विक्रम ने उठकर उन्हें साष्टांग प्रणाम किया तो भगवान ने पूछा वे क्यों इतना कठोर तप कर रहे हैं?

विक्रम ने कहा कि उन्हें राजा बली से भेंट का रास्ता पता करना है। भगवान विष्णु ने उन्हें एक शंख देकर कहा कि समुद्र के बीचोंबीच पाताललोक जाने का रास्ता है। इस शंख को समुद्र तट पर फूंकने के बाद उन्हें समुद्र देव के दर्शन होंगे और वही उन्हें राजा बली तक पहुंचने का मार्ग बतलाएंगे।
शंख देकर विष्णु अंतर्ध्‍यान हो गए। विष्णु के दर्शन के बाद विक्रम ने फिर से तपस्या के पहले वाला स्वास्थ्य प्राप्त कर लिया और वैसी ही असीम शक्ति प्राप्त कर ली।




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