फ्रायड का पत्र मार्था के नाम

WD|
तुम्हारे चाचा के घर में एक पुरुष का लेख शायद सबकी उत्सुकता का कारण बने, इसलिए क्यों न मार्था अपने कोमल कर से कुछ लिफाफों पर पते लिखकर मुझे दे दो और मैं उनके कीमती शून्य को अपनी यातनाओं से भरकर तुम्हें भेज दूँ। मार्था के जवाबों के बिना मेरा काम नहीं चल सकता। कल जो बात हमें अजीब लगी थी, आज वही अनिवार्य बन गई है और न मिलने पर पीड़ा देती है। अभी तक मुझे अपने पते का भी तो ठीक निश्चय नहीं।

वैसा नहीं हो सकेगा। जो मुझे अभी कहना है वह मैं मार्था से कह नहीं सकूँगा। मुझमें आत्मविश्वास की कमी है जो मुझसे वह बात पूरी कहला सके, जिसको तुझ किशोरी की नजरें और भाव-भंगिमाएँ मुझे कहने से रोकती भी हैं और उसकी इजाजत भी देती हैं। आखिरी बार जब हम एक-दूसरे से मिलेंगे तब मैं अपनी प्यारी को, अपनी आराध्या को दू कहकर संबोधित करना चाहूँगा, जिसे शायद बहुत समय तक हमें गुप्त रखना पड़ेगा।

यह सब लिखने में मुझे कितना प्रयास करना पड़ा है। अगर मार्था मुझसे एकमत नहीं है तो अपने संयम को तोड़कर जो पंक्तियाँ मैंने लिखी हैं, उनको पढ़कर या तो वह हँस देगी या मुँह सिकोड़ लेगी और मुझे एक लंबा उत्कण्ठापूर्ण दिन बिताने के बाद ही वह अवसर मिल पाएगा, जब कि मैं उसकी आँखों में झाँककर अपने संशय से निवृत्ति पा सकूँ।

लेकिन मैंने साहस किया है और मैं किसी अजनबी को नहीं, बल्कि उस लड़की को लिख रहा हूँ, जो मेरी सबसे प्रियतमा मित्र है। माना कि बहुत थोड़े दिनों से ही पर विचारों की असंख्य उलझनों के बाद।
मैं अपनी मित्र से इस पत्र पर पूरा विचार करने की प्रार्थना करता हूँ।

डॉ. सिंग्मंड फ्रायड
* फ्रायड और मार्था का विवाह धन की अत्यंत कमी के कारण बड़ी कठिनाई के साथ हो पाया। मित्रों से प्रार्थना की गई कि वे अपने उपहार वस्तुओं के रूप में न देकर नकदी के रूप में दें।



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