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चूहे आए सौ...
बिल्ली नाटक देख रही थी चूहे आए सौ बिल्ली बोली, मिला न चूहाबीत गए बरसोंबिल्ली कुछ आगे को आईचूहे टूट पड़ेघाव हुए चेहरे पर उसकेकाफी बड़े-बड़ेनाटक देखे बिना वहाँ सेभाग गई बिल्लीसौ चूहे थे, सबने उसकी जी भर ली खिल्ली।साथ- साथ... मैं पढ़ता हूँ अपनी पुस्तक, अपनी पढ़ना तुमऔर किसी से किसी बात पर, नहीं झगड़ना तुमसाथ-साथ ही पढ़ने जाना, साथ-साथ आनासाथ-साथ ही मिलजुल करके, गाना भी गाना। बोलो किसने...किसने इसको पत्थर माराकिसने तोड़ा पैरबेचारे मेंढक से माना किसने ऐसा बैर नहीं उछल पाता है अब वहफिर भी गाता गीतगाते-गाते आधा घंटा इसे गया है बीतपीला-पीला रंग-रंगीलायह है नन्हीं जान बैठा है सीना ऊँचा करदेखो इसकी शान।