खजराना मंदिर के गर्भगृह से छेड़छाड़ या वास्तु दोष, बारिश के लिए कई टोटके, इंदौर से क्यों रूठे बादल?
पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी की थी बारिश के लिए पूजा
इंदौर में मानसून की बेरुखी ने शहरवासियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बारिश न होने के कारणों को लेकर अब आस्था, परंपरा और वास्तुशास्त्र के गलियारों में तरह-तरह के दावे और उपाय किए जा रहे हैं। इंदौर में इस साल बारिश नहीं होने से हर कोई परेशान है। इंदौर समेत कई सीमावर्ती जिलों में मानसूनी सीजन का महीना अगस्त बीतने के बाद भी अब तक कहीं बारिश नजर नहीं आ रही है। बारिश के दिनों में पानी के टैंकर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में हर कोई अपने अपने इष्ट से शहर में बारिश के लिए प्रार्थना कर रहा है।
बता दें कि शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।
इस्कॉन में होगी बारिश की प्रार्थना : 4 सितंबर को भव्य एवं आध्यात्मिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महामन दास, अध्यक्ष, इस्कॉन इंदौर ने बताया कि श्री श्री राधा गोविंद मंदिर, हरे कृष्ण विहार, निपानिया में जन्माष्टमी के अवसर पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, विशेष श्रीकृष्ण कथा, दर्शन, अभिषेक, भजन-संकीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान इंदौर में अच्छी बारिश के लिए प्रार्थना भी की जाएगी।
बारिश के लिए ताई भी गईं थीं मंदिर : इंदौर में बारिश नहीं होने के कारण भगवान इंद्र को याद करते हुए उनके पंडरीनानाथ स्थित प्राचीन मंदिर में पूजा का विधान है। इसी परंपरा के चलते जब भी इंदौर में बारिश नहीं होती है तो शहर के लोग भगवान इंद्रदेव की कृपा के लिए मंदिर में पूजा के लिए पहुंचते हैं। इसी मान्यता के चलते बीते शनिवार को इंदौर की पूर्व सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन मंदिर में जाकर पूजा की थी। लेकिन शनिवार के बाद भी इंदौर में कोई बारिश नहीं हुई है।
बारिश के लिए निकाली थी अंतिम यात्रा : इंदौर जिले की महू तहसील के ग्राम गवली पलासिया में अच्छी बारिश की कामना को लेकर जिंदा व्यक्ति की शव यात्रा निकाली गई। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनूठे टोटके से रूठे हुए मेघराज प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है। इस दौरान एक जिंदा शख्स अर्थी पर लेटा और ढोल-धमाकों के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। गांव में फसलों को पानी न मिलने से परेशान किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस प्रतीकात्मक यात्रा का आयोजन किया। यात्रा के दौरान एक जीवित व्यक्ति को बांस की अर्थी पर लिटाया गया और उसे कफन की तरह कपड़े से ढंका गया। इसके बाद ढोल-धमाकों और धार्मिक भजनों के साथ गांव की मुख्य गलियों और चौराहों से यह जिंदा शव यात्रा निकाली गई। गांव के लोग पीछे-पीछे चलते हुए भगवान से जल्द से जल्द मूसलाधार बारिश कराने की प्रार्थना कर रहे थे। गवली पलासिया के ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि जब भी खेतों में पानी की सख्त जरूरत होती है और बारिश रुक जाती है, तो पूर्वजों के जमाने से चला आ रहा यह टोटका अपनाया जाता है। मान्यता है कि इस तरह की सांकेतिक शव यात्रा निकालने से प्राकृतिक बाधाएं दूर होती हैं और इंद्रदेव की कृपा बरसती है।
गर्भगृह से छेड़छाड़ या वास्तु दोष है वजह : दरअसल, करीब 10 साल के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब इंदौर सूखे की ओर बढ रहा है। आसमान में बादल छाए हुए हैं। लेकिन बारिश नहीं हो रही है। चर्चा है कि किसी धार्मिक अनिष्ट की वजह से ऐसा हो रहा है। चर्चा यह भी है कि खजराना मंदिर के गर्भ गृह से छेड़छाड़ करने के कारण ऐसा हो रहा है। क्योंकि मंदिर के मुख्य द्वार की छेड़ करने से परिसर का वास्तु बिगड़ गया है और बारिश नहीं होने का यह एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। वहीं कुछ लोग इंदौर का वास्तु दोष को भी दोषी मान रहे हैं।
गर्मियों में संकट लेगा विकराल रूप: अगर अगस्त में भी टैंकरों की आवश्यकता पड़ रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी गर्मी के मौसम में जल संकट कितना भीषण हो सकता है, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल भी इंदौर में पानी का संकट गहराया था और निगम को कई टैंकर चलाने पडे थे।
इंदौर में सिर्फ 18 इंच बारिश : बता दें कि शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।
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धर्म और दर्शन के जानकार व ज्योतिषाचार्य अनिरुद्ध जोशी ने वेबदुनिया को बताया कि मेदिनी ज्योतिष के अनुसार वर्ष 2026 में ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूरे भारत में बारिश का "खण्ड-वृष्टि" का योग रहा है। अर्थात कहीं बहुत ज्यादा तो कहीं बहुत कम वर्षा के योग की भविष्यवाणी थी। यदि हम मेदिनी ज्योतिष के अनुसार इंदौर में बारिश की बात करें तो अगस्त महीने में मंगल ग्रह के मिथुन राशि में रहने और सूर्य-केतु-बुध की युति के प्रभाव से बारिश में कुछ रुकावटें या खंड-वृष्टि देखने को मिलने के योग थे। हालांकि मानसून का पुनरागमन सितंबर मध्य के बाद जब मंगल ग्रह जल तत्त्व की कर्क राशि में प्रवेश करेगा और वहां पहले से मौजूद उच्च के गुरु से मिलेगा, तब मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आएगा।इस्कॉन में होगी बारिश की प्रार्थना : 4 सितंबर को भव्य एवं आध्यात्मिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महामन दास, अध्यक्ष, इस्कॉन इंदौर ने बताया कि श्री श्री राधा गोविंद मंदिर, हरे कृष्ण विहार, निपानिया में जन्माष्टमी के अवसर पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, विशेष श्रीकृष्ण कथा, दर्शन, अभिषेक, भजन-संकीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान इंदौर में अच्छी बारिश के लिए प्रार्थना भी की जाएगी।
बारिश के लिए निकाली थी अंतिम यात्रा : इंदौर जिले की महू तहसील के ग्राम गवली पलासिया में अच्छी बारिश की कामना को लेकर जिंदा व्यक्ति की शव यात्रा निकाली गई। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनूठे टोटके से रूठे हुए मेघराज प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है। इस दौरान एक जिंदा शख्स अर्थी पर लेटा और ढोल-धमाकों के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। गांव में फसलों को पानी न मिलने से परेशान किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस प्रतीकात्मक यात्रा का आयोजन किया। यात्रा के दौरान एक जीवित व्यक्ति को बांस की अर्थी पर लिटाया गया और उसे कफन की तरह कपड़े से ढंका गया। इसके बाद ढोल-धमाकों और धार्मिक भजनों के साथ गांव की मुख्य गलियों और चौराहों से यह जिंदा शव यात्रा निकाली गई। गांव के लोग पीछे-पीछे चलते हुए भगवान से जल्द से जल्द मूसलाधार बारिश कराने की प्रार्थना कर रहे थे। गवली पलासिया के ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि जब भी खेतों में पानी की सख्त जरूरत होती है और बारिश रुक जाती है, तो पूर्वजों के जमाने से चला आ रहा यह टोटका अपनाया जाता है। मान्यता है कि इस तरह की सांकेतिक शव यात्रा निकालने से प्राकृतिक बाधाएं दूर होती हैं और इंद्रदेव की कृपा बरसती है।
गर्भगृह से छेड़छाड़ या वास्तु दोष है वजह : दरअसल, करीब 10 साल के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब इंदौर सूखे की ओर बढ रहा है। आसमान में बादल छाए हुए हैं। लेकिन बारिश नहीं हो रही है। चर्चा है कि किसी धार्मिक अनिष्ट की वजह से ऐसा हो रहा है। चर्चा यह भी है कि खजराना मंदिर के गर्भ गृह से छेड़छाड़ करने के कारण ऐसा हो रहा है। क्योंकि मंदिर के मुख्य द्वार की छेड़ करने से परिसर का वास्तु बिगड़ गया है और बारिश नहीं होने का यह एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। वहीं कुछ लोग इंदौर का वास्तु दोष को भी दोषी मान रहे हैं।
इंदौर में सिर्फ 18 इंच बारिश : बता दें कि शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।

