क्या पुरुष कमजोर होते हैं?

वॉशिंगटन (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 1 अप्रैल 2009 (20:34 IST)
क्या पुरूष कमजोर होते हैं? वैज्ञानिकों ने एक नए में इस बात के सबूत जुटाए हैं कि नवजात बालक शिशु नवजात बालिका शिशु के मुकाबले अधिक खतरों के साथ जन्म लेते हैं।

66 हजार प्रजनन मामलों का अध्ययन करने के बाद इसराइली शोधकर्ताओं ने पाया कि बालिका शिशु में बाधित विकास तथा उल्टे प्रजनन जैसे अधिक खतरों का सामना करती हैं, लेकिन बालक भ्रूण को इनसे कहीं अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

तेल अवीव यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता मारेक ग्लेजरमैन ने कहा कि यदि गर्भ में बालक शिशु है तो गर्भावस्था अधिक पेचीदा हो जाती है। ऐसे में एम्ब्रोयोनिक सेक के समय से पूर्व फटने और समय से पहले पैदाइश की आशंका बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि गर्भ में यदि बालक शिशु है और वह गर्भावस्था की उचित समयावधि पूरी करता है तो उसके गर्भाशय में अधिक विकास की संभावना होती है, जिससे प्रजनन मुश्किल हो जाता है और ऑपरेशन के जरिये प्रसूति करानी पड़ती है।

ग्लेजरमैन ने कहा कि लड़के अधिक खतरे में रहते हैं। सामान्य तौर पर भी न केवल माँ के गर्भ में बल्कि दुनिया में आकर भी उन्हें पूरी जिंदगी खतरों का सामना करना पड़ता है। वे संक्रमण के प्रति अधिक नाजुक होते हैं और महिलाओं के मुकाबले उनकी रोगों से लड़ने की ताकत कम रहती है। उनकी जिंदगी की अवधि भी कम होती है। संक्षेप में कह सकते हैं कि कमजोर होते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार इस नए शोध ने दादी-नानियों की इस कहावत को सही साबित कर दिया है कि लड़के गर्भ में भी परेशान करते हैं और प्रसूति के समय भी।

ग्लेजरमैन ने कहा कि पुरुष सैनिक बनते हैं, विर्निर्माण के काम में लगे होते हैं, अग्निशमनकर्मी के रूप में काम करते हैं। वे अपने समाज को बचाने के लिए प्राकृतिक रूप से इन खतरों से खेलते हैं और बिना कोई सवाल उठाए उन्हें इस सबके लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

 

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