गुरुवार, 29 जनवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
Written By WD

वो मेरा था मगर...

रोहित जैन

कविता
उफक1 को देखकर ऐसा गुमाँ था
जमीं की दोस्ती में आसमाँ था

कोई उलझन नहीं थी इससे बढ़कर
वो मेरा था मगर मेरा कहाँ था

हुनर ही था, इसे क्या और कहिए
बड़ी तहजीब से नामेहरबाँ2 था

जमीर आया मेरी आँखों के आगे
वगरना3 मैं भी उसका राजदाँ था

यकीं तो था मुझे पर कुछ कमी थी
अजब सा फासिला इक दरम्याँ था

खता थी, हाँ खता ही थी वो मेरी
मुझे था प्यार और बेइंतिहाँ था

जहन अहमक4 जबाँ नादाँ थी उसकी
मगर दिल से बुरा 'रोहित' कहाँ था

1 उफक - Horizon
2 नामेहरबाँ - Rude
3 वगरना - Otherwise
4 अहमक- Stupid