यादें कभी मिटती नहीं
-दीपाली पाटील
यादें कभी मिटती नहीं वक्त के पन्नों सेबस पीछे चली जाती हैंनए पन्नों पर नए रिश्तेनई उलझने आ जाती हैं.जैसे गांव में छुट गए बरगद की छांव क्रांकीट के जंगलों में, बोंजाई बन सिमट जाती है। अतीत का एक सिरा हमेशाभविष्य की उंगलियों को थाम आगे बढ़ता जाता हैं। और समय की धुरी पर मृगतृष्णा सा भटकता जाता हैं।