महामहिम पधारे हैं
रश्मि रमानी
खून से रंगे हाथों पर चढ़ाकर सफद दस्ताने शातिर चेहरे की कुटिलता पर ओढ़कर मधुर मुस्कानें दुनिया के हर मुल्क को रौंदने का अरमान लिए महामहिम पधारे हैं अहिंसा के देवता की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने को। वे उदारता से करते हैं मदद गरीबों की सहायता करने में कोई कसर नहीं छोड़ते सारे जहां के गरीब कमजोर बछड़ों को बड़े प्यार से चाटती है गाय की तरह डॉलरों की जुबान। फिर एक दिन अचानक पता चलता है चाट चुकें हैं वे तो बछड़े की खाल भी धंस चुके हैं उनके खूनी दांत अधमरे बछड़े के सुखे मांस में। दिन और रात के बीच ठहरती है जितनी देर शाम बस, वे करते हैं उतना ही विश्राम धीरे-धीरे रात के अंधेरे की तरह पैर पसारते हैं चारों ओर उनींदी धरती पर फेंके अपने जाल में समेटते हैं काबिल दिमाग तृप्त होने को आतुर नींद को तरसते लोगों की आंखों में जगाते हैं समृद्धि के सपने चुरा लेते हैं होनहार युवकों की उमंगों से भरपूर जवानी से दिन का चैन, रातों की नींद बदल देते हैं जिंदा इंसान को वे कभी आंकड़ों तो कभी डॉलरों में। जल्दी ही कुंद कर दिए जाते हैं काबिल दिमाग डॉलरों की बिसात पर मोहरों की तरहचलाया जाता है उन्हें, शह और मात का ये लंबा खेल चलता है दिन-रात हर दिन बिछा दी जाती है नई बिसात गिरते-पड़ते हैं मोहरे अनवरत बुद्ध के देश में आए हैं वे करूणा का पाठ पढ़ने नहीं ना ही शांति का संदेश देने वे आए हैं हथियार बेचने सदियों पुरानी संस्कृति तबाह करने परमाणु कार्यक्रम के संधि-पत्रों पर हिंसा और विध्वंस का मसौदा लिए तैयार खड़े हैं वे अमन की झूठी इबारत लिखने के लिए।