...जब भरोसा हो!
- पंकज त्रिवेदी
परेशानी सिगार जैसी है...बाहर से जलती है मगर इंसान को अंदर से जलाती है। किस पर भरोसा करें? धोखा सिर्फ प्यार में ही नहीं होता,दोस्ती में भी होता है! अपने छोटे से स्वार्थ के लिए इंसान कितना गिरता हैं! जब अपनी अच्छाई और संस्कार से ही परेशानी हो तो क्या करें? सोचता हूँ कि वक्त जब मुंह फेर लेता हैं तो दगाबाज़ इंसानों से भेंट होती हैं! जैसे प्यार का दूसरा अर्थ है समर्पण! उसी तरह दोस्ती का अर्थ होता है भरोसा। समर्पण शब्द की अहमियत तब सिद्ध होती हैं जब भरोसा हो।