1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
Written By WD

चांदनी छत पे चल रही होगी

-दुष्यंत कुमार

हिन्दी कविता
चांदनी छत पे चल रही होगी
वह अकेली टहल रही होगी

फिर मेरा जिक्र आ गया होगा
वह बर्फ-सी पिघल रही होगी

कल का सपना बहुत सुहाना था
ये उदासी न कल रही होगी

सोचता हूं कि बंद कमरे में
एक शमा-सी जल रही होगी

तेरे गहनों सी खनखनाती थी
बाजरे की फसल रही होगी

जिन हवाओं ने तुझ को दुलराया
उन में मेरी गजल रही होगी।
लेखक के बारे में
WD