Poem on Women | ए स्त्री
पंकज शर्मा
ND
उठ! हिम्मत कर! मत घबरा!
बार-बार गिरकर भी
फिर संभल हर बार
और इस बात की जरा भी
मत कर चिंता या फिक्र
कि तू हारेगी या जीतेगी
क्योंकि तेरी जीत तो तेरी
जीत है ही, मगर
तेरी हार भी तेरी जीत से
कुछ कम नहीं है अगर
तू लड़ती है अपने
वजूद के लिए
अन्याय से, अत्याचार से
अनाचार से, व्यभिचार से
और स्वयं से भी
क्योंकि
स्त्री भी दुश्मन है
स्त्री की।
ए स्त्री
उठ! हिम्मत कर! मत घबरा!
