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Written By WD

इतनी थी बस खबर...

ग़ज़ल

ग़ज़ल
सलीम अख्तर
बादल मुखालिफत के घिरे और सिमट गए,
जो काफिले पे बोझ थे वो लोग हट गए।

चल कर खलूस गाँव से आएगा किस तरह,
रस्ते में उस गरीब के तो पाँव कट गए।

इक जाने जाना आएगा इतनी थी बस खबर,
रस्ते तमाम शहर के फूलों से पट गए।

अब और क्या सबूत दूँ अपने खुलूस का,
पत्थर मेरे खंडहर के मुहल्ले में बँट गए।