देश-विदेश में डेंटिस्ट्री का भविष्य

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आसान नहीं है परदेस की डग
इसका यह मतलब भी नहीं है कि यहाँ से बीडीएस की डिग्री लेकर आप सीधे यूएसए, ऑस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड जाकर सीधे प्रैक्टिस कर अपनी झोली भरने लग जाएँ। कई देशों द्वारा भारत की चार वर्षीय बीडीएस डिग्री को मान्य नहीं किया जाता है। यदि कोई भारत से बीडीएस कर यूएस में प्रैक्टिस करना चाहे तो पहले उसे कुछ बेसिक एक्जाम क्लीयर करनी होगी और फिर दो साल तक अंडरग्रेजुएट कोर्स अलग से करना होगा।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में प्रैक्टिस करने से पहले लाइसेंसिंग परीक्षा देनी पड़ती है उसे पास करने के बाद ही वहाँ प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस दिया जाता है। तथापि इन परीक्षाओं में वही कुछ पूछा जाता है जो कि आपने बीडीएस के दौरान पढ़ा होता है। यह बात गौरतलब है कि यह परीक्षा जितनी कठिन होती है उसमें शामिल होने की फीस भी उतनी ही ज्यादा होती है। फिर भी यह कोई महँगा सौदा नहीं है क्योंकि वहाँ डेंटिस्ट एक महीने में जितना कमा लेते हैं, हमारे यहाँ उतनी आय बरसों तक नहीं होती।
क्या करे सरकार?
डेंटिस्ट्री के उज्ज्वल भविष्य तथा मेडिकल टूरिज्म से होने वाली आय को देखते हुए यह सरकार का भी दायित्व बनता है कि वह इस उभरते तथा कमाऊ क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए अपनी ओर से पहल करे।

उसे भारतीय जनमानस में दंत सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर मल्टी स्पेशिएलिटी सेंटर स्थापित करना चाहिए। उसे डेंटल टूरिज्म को बढ़ावा देकर प्रोत्साहित करने के लिए उसे प्रमोट करना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा विदेशी प्रवासी दंत निर्वाण के लिए भारत आएँ। इससे न केवल उसकी विदेशी मुद्रा में वृद्धि होगी बल्कि युवाओं को डेंटल साइंसेज में एक नया आसमान मिल जाएगा।


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