श्री सरस्वती चालीसा

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भक्ति मातु की करैं हमेशा।

निकट न आवै ताहि कलेशा॥

बंदी पाठ करें सत बारा।

बंदी पाश दूर हो सारा॥

रामसागर बांधि हेतु भवानी।

कीजै कृपा दास निज जानी॥



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