इस वर्ष हावी रही धार्मिक कट्टरता

धर्म के मर्म को नहीं समझी जनता

WD
धार्मिक स्थानों पर हुए प्रमुख हादसे:
हे माँ चामुंडे : सितंबर में नवरात्र के प्रथम दिन ही राजस्थान के जोधपुर शहर में प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किले के चामुंडा माता के मंदिर में मची भगदड़ में लगभग 216 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 300 से ज्यादा घायल हो गए। इसकी जाँच के लिए एक न्यायिक जाँच आयोग भी गठित किया गया था। राज्य की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस हादसे पर एक दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया था। बताया जाता है कि यह हादसा भी अफवाह के चलते हुआ। इससे पूर्व उत्तरांचल के चामुंडा मंदिर में भी इस तरह का हादसा हुआ था।

हे माँ नैना : हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मंदिर में दर्शन के दौरान मची भगदड़ में 145 लोगों की मौत हो गई जो वर्ष के धार्मिक स्थल पर होने वाली मौत के सबसे बड़े आँकड़ों में से एक था। चट्टान खिसकने की अफवाह के चलते ये हादसा हुआ। देश भर के प्रमुख समाचार पत्रों में यह खबर मुख्य पृष्ठ पर रही।

दरअसल, ऐसे हादसे प्रशासनिक अमले की उस लापरवाही का परिणाम ज्यादा है जो इस तरह की घटनाओं से कोई सबक नहीं लेता। इस सबसे सबक लेकर तीर्थस्थलों को बदइंतजामी और असुरक्षा के भय से मुक्त करना जरूरी है।

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
अंतत: कहना होगा की इस वर्ष धर्म पर कट्टरवादियों का जोर ज्यादा चला। देश भर में जगह-जगह छुटपुट साम्प्रदायिक घटनाएँ या दंगे होते रहे। वहीं ‍दूसरी ओर धार्मिक स्थलों पर अव्यवस्था के चलते कई हादसे हुए। इन सबको सम्भालने में व्यवस्थाएँ असफल सिद्ध हुई। धर्म के मर्म को समझने में प्रत्येक वर्ष आ रही गिरावट भी सेंसेक्स की तरह ही रही। विश्व भर में धर्म की समझ लगभग खत्म होती जा रही है जो मानवीय मूल्यों और धर्म के लिए भयावह है।



और भी पढ़ें :