हिन्दी सम्मेलन में विदेशी हिन्दी प्रेमी..

भोपाल। में इस बार लगभग 40 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं और इनमें से कई तो उन गिरमिटिया देशों से इतर के हैं जहां हिन्दी बोली और समझी जाती है।
 
भोपाल में गुरुवार से शुरू हुए 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिस्सा लेने इटली से यहां आई प्रोफेसर मार्का जाइली ने कहा कि भारत में उनकी शुरू से ही रूचि थी और इसीलिए उन्होंने हिन्दी सीखी। जाइली इटली की वेनिस विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफेसर हैं।
 
उन्होंने कहा, 'हिन्दी में एक ग्लोबल एप्रोच है।' जाइली ने साथ ही कहा कि दूसरी भाषाओं के चक्कर में अपनी मातृभाषा को भूल जाना ठीक नहीं है।
 
चीन से आई हुआ फीन और ली यान ने धाराप्रवाह हिन्दी में अपनी बात रखते हुए कहा कि हिन्दी दुनिया की बड़ी भाषा है और इसका लगातार विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक दौर में इसे सीखना जरूरी है जिसके भविष्य में कई फायदे होंगे।
 
मारीशस की शिक्षा मंत्री लीला देवी ने कहा कि भारत से हमारा दिल का अटूट रिश्ता है। उन्होंने कहा कि मारीशस सहित गिरमिटिया देशों से बड़ी संख्या में लोग इस सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हैं क्योंकि वे सब भारत से दिल से जुड़े हैं।  
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ताजिकिस्तान की मदीना ने कहा कि कालेज में दाखिला लेने के बाद हिन्दुस्तान के बारे में उनकी दिलचस्पी बढ़ी और हिन्दुस्तान को जानने के लिए उन्होंने हिन्दी पढ़ना शुरू किया। इस समय वह दिल्ली में हिन्दी की पढ़ाई कर रही हैं। 
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पोलैंड के वारसा विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफेसर वनुती इस्ताशिक ने विश्व हिन्दी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कही गई इस बात से सहमति जताई कि हिन्दी को कई भाषाओं के उपयोगी शब्दों को अपने में समाहित करना चाहिए।> स्वीडन के उप्शला विश्वविद्यालय में लेक्चरर हिन्दी प्रेमी हेजवर्नर वेस्लर ने कहा कि हिन्दी बहुत समृद्ध भाषा है लेकिन इसे अन्य भाषाओं के समृद्ध शब्दों को समाहित करके अपने आप को और समृद्ध बनाना चाहिए।
 
विश्व की विभिन्न भाषाओं को सीखने का शौक रखने वाली कोस्टारिका की तातियाना ने शुद्ध हिन्दी में कहा, 'किन्तु हिन्दी सबसे भिन्न है। ताजिकिस्तान की उरबीबी ने बताया कि उनके देश में हिन्दी के प्रति लोगों में काफी रूझान है और वह स्वयं भी हिन्दी की अनुवादक हैं।
 
हॉलैंड की पेट्रा ने बताया कि उन्होंने भारत में शादी की है और पिछले 3 वर्षों से दिल्ली में रहकर हिन्दी सीख रही हैं।
 
सम्मेलन में हिस्सा लेने आई जापान की यू काको तोशिका ने कहा कि उनका शुरू से ही हिन्दी के प्रति झुकाव रहा है और जापान के विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी पढ़ी भी।
 
अपने देश जापान में हिन्दी शिक्षकों की कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह अब दिल्ली आकर हिन्दी की पढ़ाई कर रही हैं।
 
आरमेनिया की माने मकरचांद ने कहा कि बचपन से ही वह महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होती थीं और उन्हें समझने के लिए उन्होंने हिन्दी की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि अभी वह जेएनयू में हिन्दी की पढ़ाई करी रही है।
 
माकरचांद ने कहा कि आरमेनिया में हिन्दी और हिन्दी फिल्में काफी लोकप्रिय हैं तथा सिने अभिनेताओं में शाहरूख खान काफी पसंद किए जाते हैं। (भाषा)





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