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Written By WD

योगा टॉनिक अपनाएं, फिट हो जाएं

योगा टॉनिक
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सुबह और शाम काम ही काम। रात को घर पर जाओ तो वहाँ भी काम। बस थोड़ा बहुत ही मिलता है आराम। इसी के चलते तनाव, अवसाद और थकान जहाँ हमारे माइंड पॉवर को कमजोर करते हैं वहीं कॉलेज या ऑफिस से घर और घर से शुरू होता पुन: वही संघर्ष का सफर हमारी बॉडी को भी कमजोर कर देता है। ऐसे में क्यों नहीं अपनाते हैं आप योगा टॉनिक।

आठ घंटे सोने के बाद भी आप तनाव मु‍क्त नहीं रह पाते, रिलैक्स नहीं हो पाते, तो इसका कारण ही यह है कि कुछ और तरह के टॉनिक की आपको जरूरत है। योगा टॉनिक में सर्वप्रथम आप योगा संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

योगा संगीत से मतलब ऐसा शांतिमय संगीत या भजन जो मन को सुकून देता हो यही काम और आराम के बीच राम में रहने की स्थिति है। आप ॐ का उच्चारण भी धीमी आवाज में कर सकते हैं।..प्राणायाम मन को भीतर तक शांत कर देता है। मस्तिष्क के तंतुओं को आराम मिलता है। आखिर सब कुछ मस्तिष्क ही है तो पहले इसे ही योगा टॉनिक की जरूरत है। आप योगा संगीत के साथ ही ब्रह्म मुद्रा और पांच मिनट का ध्यान करें तो बिल्कुल ही रिफ्रेश हो जाएंगे।

इसके बाद जरूरी है शरीर पर ध्यान देना तो क्यों नहीं यौगिक आहार के बारे में फटाफट जान लें। यह बहुत जरूरी है अन्यथा आप कितने ही आसन-प्राणायाम करते रहें, वे निरर्थक ही सिद्ध होंगे। उचित आहार का चयन करें और निश्चित समय पर खाएं। आहार में शरीर के लिए उचित पोषक तत्व होना जरूरी है। ना कम खाएं और ना ज्यादा, मसालेदार तो बिल्कुल ही नहीं। निरोगी रहकर लम्बी उम्र चाहते हैं तो आहार पर ध्यान दें। यौगिक आहार का चयन करें।

हास्य योगा : सर्वेक्षण कहते हैं कि हर परिस्थिति में खुश और प्रसंन्न रहना लम्बी उम्र और स्वास्थ्य का राज है तो क्यों नहीं लॉफ्टर थेरेपी को अपने ‍जीवन का हिस्सा बना लें। सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय खूब जोर से हंसे। बिना मतलब के हंसने का मजा ही कुछ ओर है। हां, कभी मतलब के भी हंसने का मौका मिले तो चुके नहीं।

तो हमें समझ में आ गया कि योगा टॉनिक क्या है- योग संगीत, योगा ध्यान, योगा आहार और योगा हास्य। बस। हां, इसके अलावा भी कुछ अतिरिक्त चाहते हैं तो नीचे लिखे यौगा पैकेज को पढ़ने में कोई बुराई नहीं है।

*योगा पैकेज : आहार में नींबू पानी के अलावा सेवफल का सेवन कर सकते हैं। कम से कम तीन किलोमिटर पैदल चलें। हस्त मुद्राओं में -ज्ञान मुद्रा, पृथवि मुद्रा, वरुण मुद्रा, वायु मुद्रा, शून्य मुद्रा, सूर्य मुद्रा, प्राण मुद्रा, लिंग मुद्रा, अपान मुद्रा, और अपान वायु मुद्रा का अभ्यास किया जा सकता है।

हंसने पर कोई पाबंदी नहीं जब चाहें तब मुंह खोल कर हंसे। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम और ध्यान में विपश्यना का सहारा ले सकते हैं। यदि आसन करना चाहें तो हनुमानासन, पादहस्त आसन, चंद्रासन, योग मुद्रा, उष्ट्राषन, पवन मुक्तासन करें तथा इनके विलोम आसनों को भी जानें।
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