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Written By WD

भागदौड़ के बीच शांति

योग
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सुबह और शाम काम ही काम। रात को घर पर जाओ तो वहाँ भी काम। बस थोड़ा बहुत ही मिलता है आराम। इसी के चलते तनाव, अवसाद और थकान जहाँ हमारे माइंड पॉवर को कमजोर करते हैं वहीं कॉलेज या ऑफिस से घर और घर से शुरू होता पुन: वही संघर्ष का सफर हमारी बॉडी को भी कमजोर कर देता है। इस सब के चलते आत्मा दुखी हो जाती है। लेकिन योग से शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

शारीरिक शांति : थक गया है शरीर तो उसे चाहिए तनाव से मुक्ति और शांति। अंग संचालन से आप उसे थकान से मुक्ति दिला सकते हैं। फिर मार्जायासन, बिटिलिआसन और ब्रह्म मुद्रा करके उसे तनाव से मुक्त कर सकते हैं। बॉडी के जिस भी अंग में तनाव होता है अंग संचालन में उसके लिए एक्सरसाइज बताए गए है उसके द्वारा आसानी से उस जगह की ऊर्जा को मुक्त किया जा सकता है।

मानसिक शांति : आज की जिंदगी शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव से कहीं ज्यादा मनसिक तनाव देने वाली हो चली है। फिर लोगों को तनाव में रहने की आदत भी हो जाती है। इस आदत के चलते बहुत से लोग वक्त के पहले ही मौत का शिकार हो जाते हैं या फिर किसी गंभीर रोग को भोगते रहते हैं। आमतौर पर मानसिक तनाव से उत्पन्न होने वाले रोग जैसे हाईपर टेंन्सन, हार्ट अटैक और उच्च रक्तचाप से ज्यादातर लोग ग्रसित हैं। इस सब से बचने का एक ही उपाय है योग के प्राणायाम और योग निद्रा को अपने ‍जीवन का अंग बनाए।

आत्मिक शांति : जब शरीर और मन तनाव मुक्त रहकर शांति महसूस करते हैं तो ही आत्मिक संतोष मिलता है। अंतरात्मा को प्रसन्न करने के लिए 'हास्य योगा' का सहारा भी ले सकते हैं। किसी सुकून भरे समुद्र के किनारे की सैर भी कर सकते हैं। विशालकाय मंदिर के गूम्बद के नीचे बैठकर नियमित ध्यान करने से अच्छा कोई विकल्प नहीं।

योगा टॉनिक : आठ घंटे सोने के बाद भी आप तनाव मु‍क्त नहीं रह पाते, रिलैक्स नहीं हो पाते, तो इसका कारण ही यह है कि कुछ और तरह के टॉनिक की आपको जरूरत है। योगा संगीत से मतलब ऐसा शांतिमय संगीत या भजन जो मन को सुकून देता हो यही काम और आराम के बीच राम में रहने की स्थिति है। आप ॐ का उच्चारण भी धीमी आवाज में कर सकते हैं।..प्राणायाम मन को भीतर तक शांत कर देता है। मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को रिलैक्शेसन मिलता है।

आराम के आसन : खड़े रहें तो कुछ देर विश्राम मुद्रा में भी रहें। बैठे तो कुछ देर दंडासन में भी विश्राम करें। पीठ के बल सोएँ तो कुछ देर शवासन में सोएँ और यदि पेट के बल सोना चाहे तो मकरासन सबसे उत्तम है।
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