भारत के तूफानी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग के नाम विश्वकप में पहला चौका और पहला शतक बनाने की शानदार उपलब्धि भी दर्ज हो गई। 1975 से 2010 के 10 विश्वकप में यह आठवाँ प्रसंग है जबकि पहले ही मैच में किसी खिलाड़ी ने शतकीय पारी खेली है। सिर्फ 1999 (इंग्लैंड) और 2007 के (वेस्टइंडीज) ही ऐसे वर्ल्डकप रहे जहाँ पहले मैच में शतक नहीं लगा।
19 फरवरी को भारत के विस्फोटक ओपनर सहवाग ने बांग्लादेश के खिलाफ विश्वकप के पहले ही मैच में पहली ही गेंद पर चौका जडा और फिर 99 गेंदों पर नौ चौकों और एक छक्के की मदद से अपना शतक पूरा कर लिया। सहवाग का 229 वनडे करियर में यह 14वाँ शतक और विश्वकप का दूसरा शतक था।
सहवाग ने महमूदुल्ला की गेंद को लेग साइड में खेलकर एक रन लिया और बांग्लदेश के खिलाफ अपना पहला शतक बना दिया। सहवाग ने इस शतक के साथ ही विश्वकप में 15 मैचों में 600 रन पूरे कर लिए। इससे पहले विश्वकप में उनके खाते में इससे पहले 14 मैचों में 463 रन थे। उनके अब विश्वकप में 638 रन हो गए हैं।
विश्वकप की शुरुआत सहवाग ने चौके के साथ की। उन्होंने बांग्लादेश के मध्यम तेज गेंदबाज शफीउल इस्लाम की गेंद पर कवर में शानदार चौका जडकर विश्वकप की विस्फोटक शुरुआत की।
विश्वकप का पहला ओवर फेंकने का सौभाग्य शफीउल इस्लाम को मिला, लेकिन उन्होंने इस ओवर में 12 रन लुटाए। सहवाग ने साथ ही इस ओवर की अंतिम गेंद पर भी चौका मारा। सहवाग फिर तो रोके नहीं रुके और उन्होंने 94 गेंदों पर शतक जड़ दिया।
सहवाग विश्वकप में अपने दूसरे शतक के साथ ही विदेशी और तटस्थ मैदानों में दस शतक बनाने वाले तीसरे भारतीय और ओवरऑल 13वें बल्लेबाज बन गए। (वार्ता)