पब भरो, हग करो
जहाँ छलकते हैं हर पल जाम
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हममें से कुछ लोग संभवत: पब के नाम से ही अनभिज्ञ थे परंतु मंगलौर के पब में हुई युवक-युवतियों के साथ मारपीट की घटना ने 'पब' को हम सबके लिए जाना-पहचाना-सा बना दिया है। हर घटना की तरह मंगलौर के पब में हुई इस घटना के भी दो पक्ष हैं।
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ओपियम, टेंपटेशन, फायर एंड आइस, एमनेसिया, डेन ये सभी नाम है दिल्ली, मुंबई व मंगलौर जैसे महानगरों के चर्चित पबों के। जब वेलेंटाइन डे के दिन सड़कों पर कुछ दलों का प्रेमविरोधी अभियान चल रहा था तब इन पबों में युवाओं का 'पब भरो, हग करो' अभियान चल रहा था जिसका स्पष्ट अर्थ था कि हम जोशीले युवा हैं।
आप जहाँ अवरोध पैदा करेंगे, हम उस अवरोध को लाँघकर निकल जाएँगे। यही कारण है कि जब प्रेमी युगलों को सड़कों पर एक-दूसरे से प्यार का इजहार करने पर रोका गया तो वे होटलों और पबों में जाकर यह सब करने लगे। इसका मतलब यह है कि कहीं न कहीं दोष तो हमारा भी है।
वर्तमान 'पब कल्चर' एक स्टेटस सिंबल बन गया है तो यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जहाँ छलकते हैं हर पल जाम यह तब तक कायम रहेगा, जब तक इस देश के युवा स्वयं जागृत नहीं होंगे। अब हमें इस बात पर विचार करना होगा कि आखिर पब व बियर बारों की रंगीनियों में लड़खड़ाते देश की इस भावी युवा पीढ़ी को कैसे संस्कारों का पाठ पढ़ाया जाए।

